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चमड़ी
चमड़ी रगड़ करता है दमड़ी रंग भरता है भाव महंग करता है स्वभाव दंग करता है अभाव नंग करता है कर्ज तंग करता है रोग क्षीण करता है तर्क सतर
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पुस्तक
पुस्तक पुस्तक होती दीपक समान जीवन को रोशन कर देती पुस्तक होती मित्र समान जीवन में उमंग भर देती पुस्तक होती इत्र समान जीवन में सुग�
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चल रहे है देखो हम
इन जंजीरों को तोड़कर रुख हवा का मोड़कर चल रहे हैं देखो हम गर्दिशों को छोड़कर कारवां को मोड़कर चल रहे हैं देखो हम पंख हवा में खोलकर बेड�
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आओ शिक्षा के दीप जलाएं
24 शिक्षा आओ शिक्षा के दीप जलाएं हम सब मिलकर पढ़े पढ़ाएं अंधियारे को दूर भगाएं हम सब मिलकर पढ़े और पढ़ाएं एक भी बच्चा छूटने न पा�
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🚨 बेरोजगारी: भारत की सबसे बड़ी समस्या 🚨
बेरोजगारी आज के समय में हर युवा के लिए एक चिंता का विषय बन चुकी है। हर साल हजारों-लाखों छात्र डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में निकलते हैं, �
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पल पल जीवन खत्म हो रहा
पल पल जीवन खत्म हो रहा तू क्यो करता फिर तेरी मेरी। चंद साँसों का जीवन घट में पता न कोनसी रात निबेरी ।। आहत होंगे रिश्ते नाते सब धरा य
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मंजिले अभी मिली नही
मंजिले अभी मिली नही,अभी कई सफर बाकी है अपने सपने सजोने में,अभी कई डगर बाकी है..... चलना ही जिंदगी है तेरी,ज़रा हाथ थामे चलना मिलजाय हुस्न त�
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हमको न छेड़िए ...
हमको न छेड़िए… न कोई बात पूछिए न दिन की रोशनी, न काली रात पूछिए क्या ही बयां करेंगी मुफलिसी ये महफिलें हकीकत को जानना है तो हालात पूछिए
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चले लागी पिया फागुनी बयारिया
चले लागी पिया फागुनी ब्यारिया , खेतावन में हरे हरे लहके फसलिया । पियर पियर सरसों के फूलवा मन होये , मन मोहे पिया फागुनी बयारिया
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नारी
हे प्रथम वंदना की प्रतीक हे शक्तिरूप हे दयारूप हे ज्ञानरूप हे प्रेमरूप हे दिव्यरूप हे विश्वरूप तुम शक्तिरूप में आती हो तो दुर्गा ब�
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राख़
"मुल्क का खूँ बहाकर क्या पाओगे हुजरे की राख से क्या लाओगे लड़ाते हो इंसा को तुम इंसा से बड़े बदनसीब हो जाने कब समझ पाओगे कुनबे औरों के सा
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शहर के चौक पर
पुराने शहर के चौक पर आकर रुक गया हूँ उस पपीहे की आवाज सुनने की कोशिश कर रहा जो मेरे तुम्हे बुलाने की आवाज में सुर मिलाता था वो बूढ़ी दा
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