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छोटे - छोटे लोग

संदीप कुमार सिंह 25 Sep 2024 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है. जिसे पढ़कर पाठक लोग अवश्य लाभान्वित होंगें. 29882 0 Hindi :: हिंदी

आता जाता कुछ नहीं,पाले भ्रम का रोग।
जब से नेता बन गए, छोटे छोटे लोग।।
छोटे छोटे लोग,नीति वह कभी न  जाने।
खुद को समझे शेर,करे वह खाली माने।।
कहते कवि संदीप,नर्क में ये जन जाता।
रहे ज्ञान से दूर,इसे कुछ कभी न आता।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️

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