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तुम चाहो तो कर सकते हो
तुम चाहो तो कर सकते हो लक्ष्य....जो तुमने ठना हैं गमला तोड़ निकलना होगा यदि पेड़ बनाकर तुम्हें दिखाना हैं माना ये आसान नहीं है नामुम
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जाना खाली हाथ
*कविता* *जाना खाली हाथ* मुठ्ठी बांध कर आये हैं जाना खाली हाथ संग नहीं कुछ जाएगा छूट जाएगा साथ। जिंदगी भर हम सब यहां करते हैं खूब
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प्रीति _ प्रीति
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन �
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भ्रम -भ्रमण
यह दुनिया, है भ्रम का टपरा। वरना मनुज, है मिट्टी का कमरा। भ्रम ही तो है, जिस पर टिकी है धरा। भ्रम का ही खेल है, पर-परा। तेरा, मेरा, सबक�
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बात चली है
गीतिका जाने कैसी बात चली है । सहमी-सहमी बाग़ कली है । जिन्दा होती तो आजाती, सायद बुलबुल आग जली है । दुख का सूरज पीढ़ा तोड़े, सुख की म�
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प्रश्नचिन्ह
कहानी प्रश्न चिह्न यदि आंखों को बादल और झर झर झरते आंसू को मुसलाधार बारिश तथा वक्त को आषाढ़ का दिन कहें तो कोई अतिशयोक्�
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बादल
बादल रूठ गये क्यों हो हमसे तुम? सूख गये क्यों हो जल से तुम? मुझे पता है क्यों रूठे हो? बूंद बूंद से क्यों सूखे हो? छोड़ो नादानी बच्�
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पक्षीयों का संदेश
वर्षों से तिनका-तिनका कर, बुनी थी जिसे मैं। पेड़ की डाली पर बैठ, गाया करती थी मैं। जब,सूर्य लालिमा बिखेरते आसमां में, चीं -चीं कर जगाया �
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विश्वास में घात
एक बीज वपन से, पौधे उगते दो। कभी सामने वो, तो कभी सामने वो। पता नहीं कब, कौनसा, भाग जाए दे खो। यमली उपज से, मनुज बना, है सामने जो। विश्�
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जग कितना सुंदर होता
तो जग कितना सुंदर होता मेरी जमीं न मेरी होती और न तेरा अम्बर होता । जो कुछ होता अपना होता तो जग कितना सुंदर होता ।। मेरे मन के सपन
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मेहनत की राह
बिछड़ जाए गर आपकी आंखो से नींद कभी, तुम खुली आंखों का फायदा उठा कर देखो, बहानो में वक्त को यू व्यर्थ लुटाने से पहले, तुम बिगड़े मौसम को स
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कानून का नूर
लीक- लीक कीक में, कभी-कभी रहती कमी। लीक से बेलीक ना होते, तो दुनिया रहती दबी थमी, असल नसल गई मसल, फल फूल रहा क़लमी, खुला दिमाग़ फले- फूल�
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