जीना चाहता था मैं एक ऐसी दुनिया में,
जहां लोग छल-कपट से परे हो,
समझे सभी को अपने,
बनकर जिए और समझे अपने ।
सोचता-सोचता बस बनकर रह गया मुसा� read more >>
सीमा (आपकी ख्वाहिशों को मैंने सम्भाल रखा है)
बेटा अब खुद काम करके पैसे कमाने वाला हो गया था, इसलिए बात - बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था। य read more >>
थे जब हम चुप्पी साधे,
जब थे बेबस, बेसहारे,
बस चुप करा दिया हमको,
जब कुछ कहने की थी बारी।
आज तो बस आवाज़ उठाने की है हमने ठानी,
न बैठेंगे च read more >>
डर और दर्द दोनों का है नाता कोई ,
है नाता जो दोनों में बहुत गहरा,
तभी तो चीख उठी उस दर्द के मारे,
कह उठी सारी सच्चाई की दास्तां बयां,
इसील� read more >>
जब से मनुष्य ने जन्म लिया ,
तभी से उसने जीवन में है संघर्ष पाया,
इसी संघर्ष के बल पर मनुष्य ने कभी हार नहीं मानी, मानी है सिर्फ अपनी उत्थ� read more >>