धीरे धीरे ही सही हृदय में आग सी जल तो रही है,
धीरे धीरे ही सही किताबे पढ़ते हुए रात ढल तो रही है,
धीरे धीरे अब ये फसल गल तो रही है,
धीरे धीर read more >>
1891,महू में हुआ जन्म एक ज्वाला का,
एक महान नायक और देश प्रेम की माला का,
पढ़ने का उसको मिला नही कोई भी अधिकार,
क्योंकि वो था एक अछूत और एक म� read more >>
जब आँखों मे नमी आजाये अपनो मे कमी आजाये,तो रिश्ते को बचाने कि गुंजाइश करे फिर भी ना हो तो दिल कि अजमाइश करे।मन भोला है कभी न कभी डोले गा ज read more >>