कौन अपना कौन पराया समझ नहीं आता हैं,हर‌ किसी का अपना अपना मतलब नजर आता हैं,
वो जमाना गया जो अपनों पर जान निछावर करते थे , यहां तो काम ना � read more >>
सबब,, अब तन्हाई का यह तैयार कर लिया है हमने
यह जुदाई का दर्द बढ़ रहा था और बढ़ा दिया है तुमने
बिखर कर तुम्हारे पहलू से गए तो कहां जाएंगे
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1) वक्त - वक्त की बात हैं ज़नाब !
जिनकी नजरें अक्सर ढूंढा करती थी मुझको,
अब वो नजरें फेर लिया करती हैं ।
2) आजकल आतंक की दीवारें ढाह रही हैं स� read more >>