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दुःखद
जो निभा दे बस वो कसम ही सही है
यूं पल भर की हंसती निगाहों में क्या है सदा साथ रहते वो गम ही सही हैं लोग मिलते रहें राह में लाखों मगर पास दिल के रहें वो कम ही सही हैं जो
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काश तुम समझ पाती-सच्ची मोहब्बत
काश!तुम समझ पाती! मुझे यूँ छोड़कर नहीं जाती। कितना अच्छा होता, जब हम-तुम एक होते। तब,अधूरे इश्क़ मुकम्मल होते। काश!तुम समझ पाती! मुझे यू�
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साहित्य वेबसाइटों का एक उद्देश्य
यह सत्य है कि साहित्य वेबसाइटों पर कई बार लेखकों का मान्यता नहीं मिलता है और उन्हें उनके प्रयासों के लिए सम्मान नहीं मिलता है। यह समस्
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प्यार से बड़ा विश्वास होता है
प्यार से बड़ा विश्वास होता है, जहां विश्वास ही ना हो, वहां कहां प्यार होता है। Writer-Ravina pareek,✍️✍️
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साहित्य एक महान शक्ति है
आजकल इंटरनेट एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है, जो हमें विश्व के विभिन्न हिस्सों में साहित्य, कला, और संस्कृति की दुनिया से जोड़ता है। यह एक
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साहित्यकारों का मेहनती कार्य
लेखकों के साथ न्याय संबंधी मुद्दे काफी आम हो रहे हैं। यह समस्या आपकी रचनात्मकता और मेहनत को नष्ट करने का कारण बन रही है। लेखकों के द्व�
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साहित्य लाइव वेबसाइट
वास्तव में, लेखकों के साथ न्याय के अभाव का मुद्दा साहित्य लाइव वेबसाइट नयापन कर रहा है। इसके पीछे यह कारण है कि लेखक अपनी कहानियों और ग�
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किसी का दिल ना दुखाओ
किसी को दर्द ना देओ, किसी का दिल ना दुखाओ, कोई रोये आपकी वजह से, किसी को ऐसा मौका ना देओ।
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सपने हो गए राख-धुँआ- धुँआ सी जिंदगी हो गयी
ख्वाब कुचल गए, सपने हो गए राख। जब से तुझे बेवफा जाना, जिन्दगी हमारी हो गयी खाक।। धुँआ- धुँआ सी जिंदगी हो गयी, दिल में बरसातें, आँखें न�
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क्यों मैं अकेला हूँ-क्यों मैं ही दुःखों का मेला हूँ
सभी हँस -गा रहे हैं, क्यों मैं ही दुःखों का मेला हूँ। अपनों के इस भीड़ में, क्यों मैं अकेला हूँ।। क्यों मुझे अकेलापन लग रहा है, ये कैस
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उलझन-बहुत कुछ छूट जाता
बहुत कुछ पाया , तो बहुत कुछ छूट जाता । कुछ याद रहता , तो कुछ यादों से ही मिट जाता। क्या हो रहा , ख़ुद ही समझ नहीं आता। कभी ख्वाबों को ल
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वे अपना बताकर पराया करते रहें
वे अपना बताकर पराया करते रहे, उन्हें माना अपना, वे और ही ख्वाब में रहें, कुछ बिखरे पन्ने समेटे, कुछ बिखरे ही रह गये।
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