मेरे अंतर का सुख
मेरा दुख कैसे!
जीवन के अनमोल बिंदु से,
मैं विचलित कैसे!
संशय और समाधान में,
बिखरा जीवन पल पल,
समय अगर रुक जाए तो,
ना सोच� read more >>
खता हमारी बस इतनी की हमनें ,
सत्य को सत्य और झूठ को झूठ कहा ।
विफर गये नजाने कितने ही मेरेअपने,
की आखिर किस बिनाह पर मैंने ये सबकुछ कहा ।� read more >>
नहीं चुभता है,क ईबार बेगाने से,
चलो हम डूब गए, किसी बहाने से।
संग था,अपनापन था, जिन्दगी आसान थी,
घिरे मझधार में ,नही बुलाने से।
चलें जिस भ read more >>
फ़टे मटमले कपड़े उनके, तन का वस्त्र भी है ना इनके
दिन-रात का ना ठिकाना, ठीक से हो ना खाना-पाना
बच्चे के लिए वो अड़ जाता, रिक्शे पे जिंदगी सड़ ज read more >>