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दुःखद
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दुःखद
दर्दे दिल
ऐसी बहारो से क्या फायदा जिस में दिल की कली जल गई दर्द फिर से हरा हो गया।
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मरहम
तुम्हारी हर खुशी मेरे दुख का मरहम हो।
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दया करो
कविता -दया करो सूख गयी है ताल तलैया ठप बैठे हैं नदी की नैया चिंगारी सी है दोपहरिया एक बर्तन पानी धरा करो! हम पक्षी पर दया करो
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भूख पर कविता
कविता -भूख भूख की कामना है मिले रोटियां रहे सम्मान ना या बिके बेटियां भूख की आग जलती है बुझती कहां? इसके आगे ना दिखती है जन्नत जह
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गम
सजा बिछडने का हो या अकेलेपन का बहुत कड़क होता है।
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गेरो का बन जा हमदर्द,
गेरो का बन जा हमदर्द, मेरा बस दर्द बन जाना बुझ जाए हमारा दिया, ऐसा हवा का झोखा बन जाना
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मेरे स्कूल का दूध
कविता - मेरे स्कूल का दूध (एक घटना) दुःख ही जीवन की कथा रही यह सदा कष्ट की व्यथा रही। कब तक कोई लड़ सकता है! कब तक कष्�
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इज़हार
के तेरी आखों में दिखता मेरे लिए इजहार हैं तू ना मिले तो भी शिकायत नही, क्योंकि तेरी बाते ही अब मेरे जीने का आधार है ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️�
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जख्म दिल
जख्म दिल को यारा खुरेदों ना इस कदर से इसे भी दर्द और तकलीफ होती है ऐ कोई पत्थर नहीं,इसमें भी जान होती है। धन्यवाद
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ना शिकवा
ना शिकवा करेंगें,ना ही शिकायत करेंगें ना तुमसे लड़ेगें,ना तुमसे रूठेगें चुपी मेरा साथी ,दर्द मेरा यार तड़प ही मेरा प्यार। धन्यवाद
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कविता = अश्कों की धार से
कविता = ( अश्कों की धार ) ठोकरों की पछाड़ से ! बेवफ़ाई की कटार से !! मंज़िलों की लताड़ से ! गर्दिशों की मार से !! पैदा हुआ ये कवि ! अश्कों की धार स
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रांझणा
रांझणा बिच बाजार हीर ढूंढे गीत गाए आज़ा हिरे कहा गई छोड़ बिच मजधार मनवा तरसे अशुआ बरसे बिन रुके बौछार भूखा तन बिचलित मन कब तक करे इंतजा�
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