ये शाम...
उदास है,तन्हा है।
जानती हो क्यों?
क्योंकि, तुम नहीं हो।
ये शाम....
अजीब है, उत्साहहीन है।
रंगहीन और अनुपयोगी है।
जानती हो क्यों?
read more >>
माँ का खजाना बचत =) माँ के बारे में पहले भी लिख चुकी हूँ पर वह बोहत कम था माँ के बारे में जितना लिखा जायें उतना कम है। है। माँ का दिल एक विश� read more >>
लोग , सच में बेबस थे।
उस वक्त
जब, तूफानो में धा ।
भँवर मेरा
ये तो कुछ ,अब मौसम बदला है।
तब शुरू हुई है। पक्षी चह-चाहट
वरना वीरान हो गए धे� read more >>