virendra kumar dewangan 12 Oct 2024 आलेख राजनितिक EVM 29324 0 Hindi :: हिंदी
हरियाणा की हार से छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि पूरा खेल ईवीएम का है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की गई है। ये वही बघेल हैं, जो प्रदेश में पांच साल तक मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहे और सत्ता की मलाई खाते रहे, तब उन्हें अपनी जीत पर ईवीएम में धांधली नहीं दिखी। विचारणीय है कि यदि ईवीएम में गड़बड़ी की गई, तो उन्हें हरियाणा में 37 सीटें कहां से मिल गई। इसपर भूपेश बघेल का कुतर्क है कि सभी ईवीएम में धांधली नहीं की जाती, ताकि ईवीएम की विश्वसनीयता कायम रहे। ऐसा ही बेतुका तर्क कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दे चुका है कि तंत्र जीता, लोकतंत्र हारा और वे ईवीएम पर शिकायत का पुलिंदा लेकर चुनाव आयोग चले गए हैं। दरअसल, इन्हें पता ही नहीं है कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों की देखरेख में ईवीएम कैसे काम करता है? मतदान के बाद उन्हें कितने तालों में रखा जाता है? मतगणना के दौरान कितनी हिफाजत से मतगणना स्थल पर लाया जाता है और कितनी हिफाजत से मतगणना करवाई जाती है? उनकी सुरक्षा पुलिस-प्रशासन के कौन-कौन लोग करते हैं? संभव है कि ऐसे बड़बोलों को सब कुछ पता है, पर अपनी हार की असलियत को छुपाने के लिए ईवीएम को कसूरवार ठहरा रहे हैं और स्वयं या पार्टी को दोषमुक्त करार दे रहे हैं। लोकसभा या राज्य विधानसभा चुनाव के दरमियान जिला कलेक्टर जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी निर्वाचन आयोग द्वारा बनाए जाते हैं। इनके सहयोग के लिए उप जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं, जो प्रायः एडीएम या एसडीएम होते हैं। इसी तरह पुलिस विभाग मे ंएसपी, एसएसपी व एसडीओपी जिम्मेदार अधिकारी होते हैं। इन अंगूठा छाप नेताओं को शायद पता नहीं है कि कलेक्टर आइएएस व एसपी आइपीएस होते हैं, जो यूपीएससी से चयनित होते हैं और आज के प्रतिस्पर्धी जमाने में यूपीएससी से चयनित होना कोई हंसी-खेल नहीं है। ऐसा कौन कलेक्टर होगा, जिसे अपनी नौकरी प्यारी न होगी और वह चांदी के चंद टुकड़ों या धमकी-चमकी के आगे ऐसा गलत काम करेगा या करवाएगा, जिसका होना असंभव-सा है। एडीएम व एसएसपी या एसडीएम व एसडीओपी का चयन भी यूपीएससी या पीएससी से होता है। यदि कलैक्टर शासन से मिलकर इन अधिकारियों को धांधली करने का आदेश भी करे, तो ये अधिकारी ऐसा गलत काम क्यों करेंगे? क्या इन्हें नौकरी प्यारी नहीं होगी, जो बमुश्किल मिलती है। क्या इनके बाल-बच्चे नहीं होंगे, जो ऐसा गड़बड़ी कर फंसने का काम करेंगे और अपनी नौकरी को दावं पर लगाएंगे। दूसरी बात यह कि जब ईवीएम को स्ट्रांग रूम में रखा जाता है, तब उस रूम को पहले से चारोंओर से चाकचौबंद किया जाता है, ताकि कोई परिंदा भी पर न मार सके। फिर उसमें ईवीएम को मतदान केंद्रवार रखकर प्रत्याशियों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सात तालों में कैद रखा जाता है और सीलबंद किया जाता है। यहां सुरक्षाबल चौबिस घंटे तब तक अपनी ड्यूटी देते रहते हैं, जब तक की गणना पूरी नहीं हो जाती। यहां तक कि उम्मीदवार या उसके आदमी तक निगेहबानी करते रहते हैं। जिस दिन गणना होती है, उस दिन सर्वसंबंधितों के समक्ष सीलबंद ताला खोला जाता है और विशेष सुरक्षा में स्ट्रांग रूम से 10-10 पेटी गणनास्थल तक लाया जाता है, जो प्रायः उसी बिल्डिंग में होता है, जो पूरी तरह सुरक्षित होता है। इसके लिए क्लास टू आफिसरों की ड्यूटी लगाई जाती है। गणनास्थल पर भी विशेष सुरक्षा होती है, जिसमें प्रत्याशी या उसका प्रतिनिधि बैलेट यूनिट को केवल देख सकता है कि गणनाधिकारी गणना कैसे कर रहा है? गणना के उपरांत रिजल्ट बनता है, जो उप जिला निर्वाचन अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी के पास हस्ताक्षर के लिए जाता है। यहां जिला निर्वाचन अधिकारी परिणाम की घोषणा करता है। --00-- अनुरोध है कि लेखक की साहित्यिक रचनाओं का आनंद लेने के लिए गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से ‘‘प्रतिलिपि एप’’ डाउनलोड किया जा सकता है और ‘‘वीरेंद्र देवांगन’’ सर्च कर लेखक की रचनाओं को देखा-पढ़ा जा सकता है। --00--
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...