virendra kumar dewangan 21 Oct 2024 आलेख दुःखद Relision 32126 0 Hindi :: हिंदी
जोशुआ मिशन ईसाई बनाने में जुटा- किस-किस से बचिएगा और बचाइएगा हिंदुओं व देश को? देश में एक ओर धड़ल्ले से इस्लामीकरण चल रहा है, तो दूसरी बेधड़क ईसाईकरण। एक तरफ कुंआ, तो दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति है। ताजा मामला अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स से संचालित हो रहा जोशुआ मिशन का है। इस मिशन का मकसद ही है धर्मांतरण करना और जगह-जगह चर्च बनाना। कहा जाता है कि देश में 2,272 जातियों के वर्ग बनाए गए हैं। हर वर्ग के लिए एक एजेंट नियुक्त है, जो देशभर में फैले हैं। यह मिशन वर्तमान में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड व ओडिशा में युद्धस्तर पर काम कर रहा है। वह भी आदिवासी इलाकों में। दावा है कि चर्च जाने के बाद धर्मांतरित हो चुके ईसाइयों की आर्थिक व शारीरिक परेशानी दूर हो चुकी है। यही नहीं, लोगों को मुफ्त शिक्षा, शादी व सेहतमंदी के लिए बर्गलाया जाता है। चर्च का ‘स्वस्थ जल’ पीने से स्वास्थ्य लाभ का दावा किया जाता है। आवास व नौकरी दिलाने का भी झांसा दिया जाता है। मिशनरी का यह भी दावा है कि वे 6 करोड़ लोगों तक पहुंच चुके हैं, जो भारत की सकल आबादी का तकरीबन 4 प्रतिशत है। अर्थात 100 में-से 4 लोग ईसाई बन चुके हैं। जोशुआ मिशन के कर्ताधर्ता- प्रचारक-इसका बंदे का काम ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना, लोगों को चर्च ले जाना और ईसाई धर्म को बढ़ावा देना है। एक धर्मांतरण पर इसे 2 हजार रुपया और एक शादी कराने पर 1500 रुपये मिलते हैं। पास्टर-ये प्रचारक से पद में बड़े होते हैं। प्रचारक इन्हें ही रिपोर्ट करता है। इन्हें 10-20 हजार रुपया सेलरी मिलता है। ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए पहले इन्हें मोटर साइकिल मिलती थी, अब बोलेरो जैसा वाहन मिलने लगा है। पादरी-इन्हें ‘फादर’ भी कहा जाता है। इनका काम धर्मांतरण में आ रही अड़चनों को दूर करना है। इन्हें सेलरी देने के लिए किसी स्कूल या हॉस्पिटल का हेड बना दिया जाता है और 1 लाख रुपया महीना भुगतान किया जाता है। सभी पास्टर पादरी को रिपोर्ट करते हैं और ये पादरी/फादर अपना रिपोर्ट बिशप को सौंपते हैं। --00-- निवेदन है कि पढ़ने के उपरांत कमेंट व शेयर करना ना भूलें।
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...