virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 आलेख अन्य Personality 113856 0 Hindi :: हिंदी
राष्ट्रीय एकता के शिल्पकारः सरदार पटेल जब 1939 में कांग्रेस ने अपने हरिपुरा अधिवेशन में देशी रियासतों को भारत का अभिन्न अंग मानने का प्रस्ताव पास कर दिया, तब से सरदार पटेल का दिल-दिगाग राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में कार्य करना आरंभ कर दिया था। इसके लिए उसने रियासतों में प्रजामंडल और अखिल भारतीय प्रजामंडल की स्थापना करवाई। इस दूरदर्शितापूर्ण निर्णय से जहां मोहम्मद अली जिन्ना की कुटिल चालों, जिसमें द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत भी शामिल था, कुठाराघात हुआ, वहीं भारतीय नेताओं का मानस उनके दूरदृष्टिपूर्ण निर्णय से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। सरदार पटेल का अविस्मरणीय योगदान 565 छोटी-बड़ी देशी रियासतों का विलीनीकरण है। दुनिया के ज्ञात इतिहास में एक भी ऐसा शख्सियत नहीं है, जिसने इतनी विशाल संख्या में बगैर खून-खराबे के राजे-रजवाड़ों का न केवल विलीनीकरण करने का हौसला दिखाया, वरन करके भी बता दिया हो। इसके लिए 05 जुलाई 1947 को एक रियासत विभाग बनाया गया और इसकी कमान सरदार पटेल को सौंपी गई। एक दिन उन्हें मालूम हुआ कि बस्तर की रियासत में कच्चे सोने का भारी भंडार है, जिसे हैदराबाद का निजाम दीर्धकालिन पट्टे पर लेना चाह रहा है। इस खबर ने उनके जेहन में आग लगा दी। वे वीपी. मेनन को लेकर रियासतों के एकीकरण के कठीन डगर पर चल पड़े थे। वे पहलेपहल उड़ीसा पहुंचे और सब राजाओं को भुवनेश्वर बुलाकर कहा,‘‘कुएं के मंेढक मत बनो। महासागर में आ जाओ।’’ इसके पश्चात वे नागपुर पहुंचकर 38 राजाओं से मिले, जिनमें 14 राजा छग के भी थे। इन राजधरानों में यह परंपरा थी कि कोई इनसे मिलने आता था, तो ये तोपों की सलामी दिया करते थे, इसलिए इन्हंे ‘सैल्यूट स्टेट’ कहा जाता था। इनकी बादशाहत को आखिरी सलामी सरदार पटेल ने दी थी। इसके बाद वे 250 रियासतों वाले काठियावाड़ क्षेत्र पहुंचे। इनकी रियासतों के बारे में जब असलियत का पता चला, तो वे हैरत में पड़ गए। ये रियासतें नाममात्र की थी। कई तो महज 20-25 गांवभर के मालिक थे। सबको अपनी दृढ़ संकल्पशक्ति से भारत के नक्शे में मिला लिया। फिर वे बम्बई और पंजाब गए। वहां भी उन्होंने अपनी कठोर संकल्पना का परिचय दिया और सबको अपनी झोली में डाल लिया। यहां केवल फरीदकोट के राजा ने ना-नुकूर की। इसपर सरदार पटेल ने बस इतना पूछा,‘‘क्या मर्जीे है आपकी?’’ फरीदकोट का राजा पसीने-पसीने हो गया। इस तरह 15 अगस्त 1947 तक कश्मीर, जूनागढ़ व हैदराबाद को छोड़कर सारे-के-सारे राजा-महाराजा भारतीय संघ-राज्य के अंग बन गए। आखिरकार, 09 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ रियासत भी भारत का अंग बन गया। हैदराबाद 18 सितंबर 1948 तक भारत संघ में सम्मिलित नहीं हुआ था। उसको भी उन्होंने केवल 04 दिन की पुलिसिया कार्यवाही और कठोर सबक देकर भारत में एकाकार कर लिया, जो अंतिम रियासत था। हैदराबाद को जब भारत में मिलाने की कार्यवाही की जा रही थी, तब तरह-तरह की आलोचनाओं का सामना सरदार पटेल को करना पड़ा, लेकिन जब कार्यवाही संपन्न हो गई, तब यही आलोचक, उनके प्रशंसक बन गए थे। जूनागढ़ और हैदराबाद रियासत को भारत संघ में मिलाने में उनकी भूमिका ‘लोहे के समान दृढ़ पुरुष’ की रही, इसलिए उन्हें ‘लौहपुरुष’ कहा जाने लगा। कश्मीर 26 अक्टूबर 1947 को भारतीय संघ में तब शामिल हुआ, जब कबायलियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर को हड़पने के लिए आक्रमण कर दिया। इससे कश्मीर भारत संघ का एक राज्य तो बना, लेकिन बहुतेरे और अंतहीन विवादों को जन्म दे दिया, जो आतंकवाद के शक्ल में आज तलक भारत को दंश दे रहा है। सरदार पटेल की तुलना कतिपय इतिहासकार जर्मनी के बिस्मार्क से करते हैं। बिस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण सत्ता की शक्ति के बल पर किया था, जबकि सरदार पटेल ने इच्छाशक्ति व साहसिक निर्णय से बगैर रक्तपात के किया। यही कारण है कि उन्हें 1991 में भारतरत्न से नवाजा गया। उनकी जन्मजयंती 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है। सरदार पटेल न केवल राष्ट्रवादी नेता थे, अपितु सही अर्थों में भारत के निर्माता और उसके शिल्पी भी थे। उन्होंने देश को एक सूत्र में बांधने का स्तुत्य कार्य किया है। कृतज्ञ राष्ट्र अब उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का मूल्यांकन कर रहा है, जो उनके प्रति सच्ची श्रृद्धांजलि कही जा सकती है। केंद्र सरकार ने गुजरात में नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर बांध के पास उनकी 182 मीटर अर्थात 597 फीट ऊंची मूर्ति, ‘स्टैच्यू आफ यूनिटी’ स्थापित की है और राष्ट्रीय एकता के सच्चे प्रतीक लौहपुरुष का गौरवगान करते हुए उस क्षेत्र को पर्यटनक्षेत्र के रूप में विकसित किया है। --00-- अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर ‘‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला veerendra kumar dewangan से सर्च कर और पाकेट नावेल के चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर किया जा सकता है। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी। --00--
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...