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साम्प्रदायिकता

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 21 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम 253 0 Hindi :: हिंदी

‘‘साम्प्रदायिकता’’

भारत भूमि में 
हम जन्में यारों,
यह देश हमारा
 अपना है,
उद्धार करो इस
 मात्र भूमि का 
यही हमारा सपना है ।

इस दुनिया में मानव का 
इतिहार बहुत पुराना है,
मिलकर हर मानव को 
यह पाठ पढ़ाना है,
साम्प्रदायिकता के भूत को 
अब दूर भगाना है ।

रहे शांती और सौहार्द
जगत में यह सन्देश
अब लेकर जाना है,
कट्टरता की बेड़ियों से
मुक्त हो हर कौम 
ऐसा वचन निभाना है।

राम-रहीम सब एकही जानो
पुरखों ने सिखलाया है,
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई,
सबको गले लगाया है ।

धर्म पर लोगों में जब 
धर्मान्धता आ जाती है,
दंगे, फसाद होते है तब
निर्दोषों की जाने जाती है।

हो न कोई अनहोनी 
इस बात को अमल में लाना है 
मानव एकता के धर्म को
 शिखर पर पहुॅचाना है।

रचनाकार-
महेश्वर उनियाल
7579155644

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