महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 21 Jun 2026 कविताएँ समाजिक 151 0 Hindi :: हिंदी
चलो एक वृक्ष लगायेें आओ चलो एक वृक्ष लगायें मानव होने का फर्ज निभायें, सावन के हम गीत गायें धरा के यौवन को महकायें। पेड़ नहीं है, स्वांस है ये ज़िन्दगी की आस है ये धरा के है, ये आभूषण दूर करें ये प्रदूषण। चिलचिलाती धूप में छांव हमें ये देते है, निःशुल्क है इनकी हर सेवा हम से कुछ नहीं लेते है । आओ मिलकर पर्यावरण बचायें वृक्ष रोपकर हम नया इतिहास रचायें। जन्म दिवस के मौके पर एक नया हम पेड़ लगायें, जीव जगत में जीने हेतु हरा-भरा संसार बनाये। गौरा देवी हो या बहुगुणा सबका है बस यही सुझाव पेड़ कटे न, भूमि बहे, आओ इनका करे बचाव। संकल्प हमारा आज से हम खूब पेड़ लगायेंगे, परमेश्वर की इस धरती पर हम हरियाली लहरायेगें। सब मिलकर ये सौगन्ध खायें और ढृढ़ता से फिर दोहरायें, आओ चलो एक वृक्ष लगायें मानव होने का फर्ज निभायें, रचनाकार- महेश्वर उनियाल 7579155644