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Santosh kumar koli ' अकेला'
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Santosh kumar koli ' अकेला'
Santosh kumar koli ' अकेला'
Santosh kumar koli ' अकेला'
@ santosh-kumar-koli
, Rajasthan
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मेल
तोता बोला कबूतर से, दिनों बाद याद आई। पंख फड़फड़ा बोला कबूतर, मेल नहीं बैठा भाई। कर टे टे तोता बोला, यह क्या होता है मेल? गुटरगूँ- गुट
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नेकी का दर्द
तिनके के अवलंबन से, तैर जाता डूबता। तैरकर तृण को ही डुबाए, यह कैसा का़यदा? बाड़ की आड़ में, उग आती दूब यदा- कदा। उग बाड़ को ही बाढ़ दे,
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ज़मीन और किसान
पैसों की चमक, हलधर रश्मि को मना नहीं सकती। बैसाखी अपने बल पर, विजय जामा पहना नहीं सकती। कमकस को ज़मीन, कृषक अपना नहीं सकती। मिल्किय�
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तैयार रहो
जन्म लेने वाला, एक दिन मरता भी है। उदित, अस्ताचल को जाता भी है। जो खिला, वह मुरझाता भी है। गले जो मिला, वह बिछुड़ता भी है। बुढ़ापा ह�
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रावण का दूसरा पक्ष
बाहुप्रलंब, बाहुबल से, कैलास को ही उठा दिया। विश्व विजयी ने, त्रिलोक को हिला दिया। सारे देवगण सेवा में रहते, ऐसा जलवा दिखा दिया। शौ�
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सब कुछ बुरी
ख़ाली हवेली बुरी, राज में रैली बुरी। मतलब की सहेली बुरी, पर नारीकेलि बुरी। जीवन में घुल गांठ बुरी, अफसर की डांट बुरी। भाइयों की आं�
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जरूरी तो नहीं
जरूरी तो नहीं। हर जाम को महफ़िल मिले, हर राही को मंज़िल मिले। हर कश्ती को किनारा मिले, खोया अवसर दुबारा मिले। जरूरी तो नहीं। हर नदी
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चटोरा मन
दूध कटोरा छोड़, कोल्ड ड्रिंक लेते लपक। चाय सुबह नहीं मिली, मानों धरती गई दरक। नशेबाज़ को नशा नहीं मिले, जाता हड़क। मद का प्याला दिख�
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कलयुग के रंग
लगेगी कलयुग की फटकार, मचेगा जग में हाहाकार गाय, खूंटा तुड़वाकर भागेगी, निज पति संग रास नहीं, नारी पर पुरुष से नैन लड़ाएगी। औरों की �
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आंकड़ा
शहर में विस्फोट के, सुनो समाचार। अलग-अलग जगह बम फटे, बम फटे दो-चार चालीस के चिथड़े उड़े, मृतक सौ के पार। साठ इलाज दौरान मरे, आंकड़े ज�
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