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Santosh kumar koli ' अकेला'

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My Articles

१ चुका उधार पेड़ों से धरती का कर श्रंगार २ जीवन पथ मिला ताल से ताल रुकना मत ३ये संध्या लाली झिलमिल चूनर आभा निराली read more >>
ऩजर को लगी ऩजर, दिखाई देते पर दोष। खुद को तो मानता, गुण-रत्न का कोष। दूसरों की उघाड़कर, खुद की ढकने का होश। दूर की जलती सूझे, घर में जले तो read more >>
न मानी की, न ज्ञानी की, न ही भगतों की। ये दुनिया है, नकटों की। नकटों के नकटे दोस्त, नकटों की जमात बड़ी। सारे नकटे एक से, नकटे से नकटे की नज़र � read more >>
छोड़ छोड़, तू छोड़ चुप्पी। समाज को, ग़लत दिशा दे रही। एक अंतहीन, काली निशा दे रही। समाज को, ग़लत संदेश सुना रहा। चुप्पी को व्यक्ति, अपने हिसा� read more >>
गड्ढा खोदूँगा पर राहों में, खुद को मिलेगी खाई। काँटे बोउँगा औरों के तई, मिलेगी कंटक शय्या बिछाई। आम नहीं पाउँगा, जो आक करूँगा बुआई। जै� read more >>
दुनिया में, मरण समझदार का। समझदार समझ से, समझ समझके समझ जाता है। अरे, वह तो नकटा है,वह नकटाई से ही सुलझ जाता है। अरे, तू तो समझदार है, वह स� read more >>
कोई नहीं सुनता, दुनिया में व्यथा डोर की। सब अपनी- अपनी बेचते, कौन बेचता कमज़ोर की। पतंग परवान चढ़, मेरे बल नाचती। मेरे छोर से और बनती, दु read more >>
उल्टी दिशा, उल्टी बयार। हे दुनिया, तेरे रंग हज़ार। आतंकवादी, शांति का पाठ पढ़ाते हैं। रिश्वतख़ोरी खून में, ईमानदारी सिखाते हैं। गद्द read more >>
न ज़रूरत न हसरत, दूसरों को बदलने की। ज़रूरत व हसरत है, खुद के सुधरने की। वे तो न सुधर सके, उनका कोई ख़ता नहीं। सुधारने के फेर में, खुद कित� read more >>
ली प्यासी धरती ने अंगड़ाई। बरसीले बादल ने दी रूनुमाई। मिली ताल- तलैया को तरुणाई। कोयल, मोर, पपीहा वाणी, समां- छटा सरसाई। नदी, झील ,झरना, � read more >>
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