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लब पे' आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी, ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी । दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाए हर जगह मेरे चमकने से read more >>
रंग बदलती पल _पल खूब है ज़िंदगी, फिर भी बहुत ही हर्ष देती है ज़िंदगी। चाहत दिल में सैकड़ों जवां हुए हैं, खुदा जरा साथ दें दगा ने दें ज़ि read more >>
चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर अंत में वो ख्वा read more >>
किसने जाना कि कल है क्या होगा कुरबतें या के फ़ासला होगा आज रोया है वो तो रोने दो हो न हो ख़ुद से वो मिला होगा चांद जो पल में बन गया मिट् read more >>
हँसने का हँसाने का हुनर ढूंढ रहे हैं हम लोग दुआओं में असर ढूंढ रहे हैं अब कोई हमें ठीक-ठिकाने तो लगाए घर में हैं मगर अपना ही घर ढूंढ रह� read more >>
ज़िन्दगी के फलसफ़े में अब न उलझाना मुझे ख़ुद समझ लेना तो उसके बाद समझाना मुझे मेरी दिन भर की उदासी को समझ लेता है वो शाम होते ही बुला लेता read more >>
डूबते वक्त क़िसी का तो सहारा होता कोई तिनका, कोई कश्ती या किनारा होता क्यों पसोपेश में रहते कि किधर जायें हम तेरी जानिब से अगर कोई इशा� read more >>
ख़ुद को ग़म से छुड़ा लो ज़रा एक दीपक जला लो ज़रा रात काली अमावस हुई अपनी पलकें उठा लो ज़रा हर क़दम पे सजे आशियाँ पाँव अपने सम्भालो ज़रा दोस्� read more >>
ख़ुद को ग़म से छुड़ा लो ज़रा एक दीपक जला लो ज़रा रात काली अमावस हुई अपनी पलकें उठा लो ज़रा हर क़दम पे सजे आशियाँ पाँव अपने सम्भालो ज़रा दोस्� read more >>
ख़ुद को ग़म से छुड़ा लो ज़रा एक दीपक जला लो ज़रा रात काली अमावस हुई अपनी पलकें उठा लो ज़रा हर क़दम पे सजे आशियाँ पाँव अपने सम्भालो ज़रा दोस्� read more >>
दुनिया की लिये ख़ैर-ख़बर डूब रहा है तय कर लिया सूरज ने सफ़र डूब रहा है हम मंदिरो-मस्जिद को बचाने में लगे हैं घर की है नहीं फ़िक्र कि घर डूब र read more >>
अब तो ख़ुशी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा आसूदगी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा सब लोग जी रहे हैं मशीनों के दौर में अब आदमी के नाम पे कुछ भी नहीं रह� read more >>
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