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थे एक तपस्वी ऐसे वो जो आज धरा पर नहीं रहे। कर दिया समर्पण् जीवन सब और भ्रातृ प्रेम में रमे रहे।। जिस माँ की गोद में खेले थे उस माँ के लो read more >>
प्रेम से जिसने जग को मोह लिया, आपने पिता के वचनों के खातिर, राज -पाठ से भी मुंह मोड़ लिया, 14 वर्ष वनवास किया, हर कठिनाई से लड़ने का प्रयास � read more >>
पहली नजर का प्रेम,करता बेचैन,जब असफल होता है पहली नजर का प्रेम, इसे पा लेने वालों को मिलता है बहुत चैन, इस प्रेम को खोने में कटते हैं, दुख � read more >>
चल पड़ी पंक्तियां प्रेम के कुंज में रो पड़ी ये दिशाएं तुम्हारे लिए। सोचते सोचते नीर बादल बना गंगा निर्मल वही है तुम्हारे लिए। नेहा द read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल से,भारी हो नुकसान। और व्यर्थ चिन्ता रहे,जाते घट है मान। मंद पड़े तब हौसला,आ� read more >>
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उनको भी तो हो पता,मुझको उनसे प्यार। एक जरा सी भूल हो,कर दूं मैं इजहार।। कर दूं मैं इजहा� read more >>
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल,नुकसान करती भारी। पीछे और धकेल,चलाए मुझ पर आरी।। रहे निकलती आह,दर्द को फिर दि� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल से,भारी हो नुकसान। और व्यर्थ चिन्ता रहे,जाते घट है मान।। एक जरा सी भूल ने,ले ल� read more >>
बेहद प्रेम उसी से क्यों होता है जो नसीब में नहीं होता क्यों किस्मत हमें इतना रूलाती है और जो हमारा नहीं है उसी को सामने क्यों बार - बा� read more >>
धरती मां की बात है निराली, सदियों से ये हमसब को है पाली। ममता की जी अदभुत खजाना है, इनसे से ही दुनिया है चल रही। ग्रहों में जो सबसे उत्त read more >>
*माय तुझी वानी माझ्या बोलितून* आईचे रूप स्मरावे अन डोळा यावे पाणी. नि सूर तिचा आठवता का हळवी व्हावी गाणी!! हा सुंगध येतो मजला त्या सात read more >>
उड़े बादल- मनमौजी है ए-आवारा, सुखा कहीं बाढ़- फिरता है ए-आवारा,, नाना रूप हैं- जगत में खुशी कहीं गम, नाचे कहीं- किसान हैं देखो कहीं गम,, read more >>
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