बादल छाए घने, बरस रही है बूंदें,
गरजती है बिजली, चमक रही है बिजली ।
मन में आई है आनंद की भरमार,
सावन की रातों में, खुशियों की बहार।
पानी क� read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृणा युक्त है नाज।।
आया समय चुनाव का, गली गली में शोर।
सबके दामन एक सा, � read more >>
(दोहा छंद)
सभी बदलाव में लगे, आ जाए अब होश।
आया समय चुनाव का, लोगों में भी जोश।।
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृ� read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का, पार्टी सब में होड़।
अपने अपने ढंग से, बनते सब बेजोड़।।
आया समय चुनाव का, करते सभी प्रचार।
खूब सभाएं हो रहे, अ� read more >>
सजा के मंडी -
गद्दी पे बैठकर ;
ढोंग रचा रहा पाखंडी ,
ले के सब सब से वोट -
आघात किया दे के -
सब को चोट ;
तू भूल गया -
अपना परिचय ,
जो भी है तू -
है � read more >>
(दोहा छंद)
पर करना है कर्म भी, है यह बात अतीक।
राम भरोसे चल रहा, यह तो है बहु ठीक।।
राम भरोसे चल रहा, लोगों के विश्वास।
धोखे वाले हर कहीं, � read more >>