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(दोहा छंद) आओ मित्रों बैठ लूं,दिल से दिल लूं जोड़। चले न कोई जोर अब,कोई हमें न तोड़।। रिमझिम सी बरसात में,मुझे हुआ है प्यार। चले न कोई ज� read more >>
(दोहा छंद) बेकाबू जब मन रहे,चले न कोई जोर। देते रब को दोष तब,रखे भावना चोर।। चले न कोई जोर तब,मन की जब हो बात। पहले ही हम भाँप कर,कर लेते ख read more >>
(रोला छंद) चले न कोई जोर, करे मन हरदम अपना। फिर भी अपनी सोच, पूर्ण करना है सपना।। रखता सदा विवेक,तभी रहता मन काबू। चलता अपनी राह, कहे मुझक read more >>
(मुक्तक छंद) मोहन खेले रंग हो,राधा रानी साथ। अनुपम उलफत है यहां,हाथों में ले हाथ। रहे याद मय रंग यह,जीवन दिव्य पुनीत_ सभी अदावत भूल कर,र read more >>
(मुक्तक छंद) कलाकार वो खूब,रहे जिसमें दृढ़ मस्ती। जाऊं उसमें डूब,मगर डूबे मत कस्ती। रखूं जिया में लाज,रहूं दुनिया में मिलके_ संगी दुश read more >>
( मुक्तक छंद ) जीवन के अब यार क्यों, बिगड़ गए सुर ताल। आओ कुछ मंथन करें,करिए खत्म बवाल। महँगाई की मार से,कमर गई है टूट_ खोए अपने में सभी,बढ� read more >>
(मुक्तक छंद) धीरे धीरे ही सही,करता रहूं विकास। छू लूं नभ को एक दिन,फिर भी कमें न आस। अपनो का मधु प्यार हो,खुशियाँ रहे अकूत_ सपने सब मंसू� read more >>
बरसता पानी, गरजते बादल, चमकती बिजली , मदहोश हवाऐं , हवाओं में बहता संगीत.... बूंदों में रबानी उन पलों में.. तुम्हारे हमारे धड़कते दिल... द read more >>
बरसता पानी, गरजते बादल, चमकती बिजली , मदहोश हवाऐं , हवाओं में बहता संगीत.... बूंदों में रबानी उन पलों में.. तुम्हारे हमारे धड़कते दिल... द read more >>
तुम्हारी, सांसों की, सरगम , और मेरी धड़कन की, युगलबंदी से, बनता है.... हमारे , जीवन में, मधुर संगीत.... उदय सिंह कुशवाहा ग्वालियर मध्य प्� read more >>
सुनो, जो तस्वीर बनाई है, अपने जहन में मेरी .... तुमने उसको सभांल कर रखना.... उसमें पल- पल बदलती सूरत दिखती है, मेरी..... उदय सिंह कुशवाहा read more >>
नींद बेच झुकानी खरीदी ये कैसी महंगाई हैं तुझसे इश्क़ कर रोज हैं मरते ऐ कैसी जिंदगानी हैं पगडण्डी सी तू आडी टेढ़ी फिर भी तू इतराती है� read more >>
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