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(दोहा छंद) दूर्जन से दूरी भली, लगा सके वह दाग। कर सकता बदनाम भी, नहीं जानता राग।। दूर्जन से दूरी भली, फँसा सके वह जान। उलझन देगा आप को, कर read more >>
(दोहा छंद) कर सकता बदनाम भी, नहीं जानता राग। दूर्जन से दूरी भली, लगा सके वह दाग।। दूर्जन से दूरी भली,बाधा में दे डाल। रुक जायेगा काम भी, read more >>
(दोहा छंद) घोंपे पीछे वह छुरा, उसका यह है जात। दूर्जन से दूरी भली, सदा करे आघात।। दूर्जन से दूरी भली, मन में रखता पाप। करता साथी का बुरा, read more >>
(दोहा छंद) नफा और नुकसान का,रखिए प्रतिदिन ध्यान। कारण को तब जानकर, प्रगति करे इंसान।। नफा और नुकसान में, मत फंस मेरे यार। सही कर्म करत� read more >>
(दोहा छंद) नफा और नुकसान बिन,नहीं चले हर काम। तन मन से रख ध्यान जब, मिलता सही मुकाम।। नफा और नुकसान का,रखिए प्रतिदिन ध्यान। कारण को तब � read more >>
(दोहा छंद) नफा और नुकसान दो,पहलू ही है माप। दिल से कर के काम को, रहें नफा में आप।। नफा और नुकसान से, पहले डर मत यार। धंधा को अब कर शुरू,जी� read more >>
(दोहा छंद) डरना कभी न चाहिए, और रहें बन तीख। दुख से बचे न राम जी, हम सब लें यह सीख।। दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर। मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद) राजा हो या रंक हो,करिए कभी न अत्य। दुख से बचे न राम जी, जीवन का यह सत्य।। दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर। मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद) दुख से बचे न राम जी, वक्त बड़ा बलवान। सुख दुख आते ही रहे, देते रहते ज्ञान।। दुख से बचे न राम जी, सुख दुख से है प्राण। हारे कभी न read more >>
(कुंडलिया छंद) आओ मित्रों बैठ लूं,दिल से दिल लूं जोड़। चले न कोई जोर अब,कोई हमें न तोड़।। कोई हमें न तोड़,करे सलाम सब हमको। दुनिया में ह read more >>
(कुंडलिया छंद) आओ मित्रों बैठ लूं,दिल से दिल लूं जोड़। चले न कोई जोर अब,कोई हमें न तोड़।। कोई हमें न तोड़,करे सलाम सब हमको। दुनिया में ह read more >>
(दोहा छंद) रिमझिम सी बरसात में,मुझे हुआ है प्यार। चले न कोई जोर अब,सुन लो यह दिलदार।। बड़ी बड़ी है आँख दो,सूरत है चितचोर। दीवाना मैं ह� read more >>
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