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कविताएँ
इच्छाओं के दास हूं-करूं नहीं आराम
कुंडलिया छंद करता अथक प्रयास मैं,पाया सही मुकाम। इच्छाओं के दास हूं,करूं नहीं आराम।। करूं नहीं आराम,सृजन उत्तम मैं करता। देता हूं उ�
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सदा कोसते भाग्य-दूर सच से वह भागे
कुंडालिया छंद जिनके कच्चे कान है, बिल्कुल है नादान। खाते धोखा वे सदा, नाश करे वो मान।। नाश करे वो मान,नहीं बढ़ते वह आगे। सदा कोसते भाग�
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मधुर वचन के साथ-आगे बढ़िए आप
कुंडलिया छंद संकट हरने के लिए, मधुर वचन के साथ। आगे बढ़िए आप सब,हाथों में ले हाथ।। हाथों में ले हाथ,भला करता हम सबका। संकट करता दूर,दुआ
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जिनके दिव्य प्रताप से-मनुज किए उत्कर्ष
कुंडलिया छंद जिनके दिव्य प्रताप से,मनुज किए उत्कर्ष। अवधपुरी में धूम है, भारत में है हर्ष।। भारत में है हर्ष,राम के सब गुण गाते। प्रभ
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मानवता ही धर्म है-प्यार सदा अनमोल
कुंडलिया छंद मानवता ही धर्म है,प्यार सदा अनमोल। करे कर्म से याद जग,मीठे रखते बोल।। मीठे रखते बोल,रहे सबसे वह आगे। बनते दिव्य मिशाल,सद
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मुस्कुरा रहा था चांद हमारा देखा-कल रात एक नजारा देखा
कल रात एक नजारा देखा मुस्कुरा रहा था चांद हमारा देखा चमक रहे थे सितारें अम्बर में मिल रही थी बूंदें बारिश की समंदर में गर्दिश में छा
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भारत का हूं लाल-शत्रु पर भाड़ी पड़ता
कुंडलिया छंद चाहत अभी जवान है,गौरव मय है भाल। साँस साँस में हौसला,भारत का हूं लाल।। भारत का हूं लाल,शत्रु पर भाड़ी पड़ता। वैसे हूं दिल
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अच्छाई पर जो चले-उनका निश्चित जीत
कुंडलिया छंद अच्छाई पर जो चले,उनका निश्चित जीत। दुनिया का वह कर भला,देखे नहीं अतीत।। देखे नहीं अतीत, आज को मन से जीते। हरदम रखते जोश,प�
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घर घर हो उजियार-दुखों की छाँव भगाती
कुंडलिया छंद अच्छाई की भावना, लाती सदा बहार। बनते दूजे के लिए, अनुपम दिव्य विचार।। अनुपम दिव्य विचार,ज्ञान की ज्योति जलाती। घर घर हो �
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बने रहिए सब अच्छा-सीखें इनसे ज्ञान
कुंडलिया छंद अच्छा है दिखता नहीं, आने वाला काल। गरमी से बदहाल है, सभी जीव की चाल।। सभी जीव की चाल,दिखे सुन्दर दुनिया में। करिए सभ्य वि�
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बने रहिए सब अच्छा-सीखें इनसे ज्ञान
कुंडलिया छंद अच्छा है दिखता नहीं, आने वाला काल। गरमी से बदहाल है, सभी जीव की चाल।। सभी जीव की चाल,दिखे सुन्दर दुनिया में। करिए सभ्य वि�
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संसार-माया से संसार है सबका अपना दाम
कुंडलिया दिवस माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समाँ रौशन तब रहता। छोड़ें कभी
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