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(मुक्तक छंद) घर के रहे न घाट के, थोड़ा अब तो सोच। चलें सँभल कर अब जरा,रहे नहीं संकोच। मैया नैया पार कर,जीवन कर गुलजार_ बढ़े बुद्धि में तेज read more >>
(मुक्तक छंद) हमराही से प्यार है,करता सदा दुलार। जीवन भर का साथ है,खुशियां हो बौछार। खुशियां हो बौछार जब, स्वस्थ रहे तब गात_ जीने का तब ह� read more >>
(दोहा छंद) हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग। मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग। जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_ खुशियों से � read more >>
(मुक्तक छंद) हलचल करें मत यूं कि नव, तकरार हो जाए। जीना हमें है शान से, ना रार हो जाए। हसते रहें भाई यहां, जीना यही सुन्दर_ सबको निजी बात� read more >>
(मुक्तक छंद) उसके दिलों में भी सदा, ही प्यार हो जाए, मेरी अमर यह प्रीति है, इकरार हो जाए, दुनिया बने नव एक सच, का ही जहां टिकता_ सबको अगर स� read more >>
(मुक्तक छंद) घर सभी के नव खुशी, नित मान लाती बेटियां। इस धरा को गुल भरे, रंगों सजाती बेटियां। फूल सी खुशियां लगे, सब को सदा ही नन्दिनी_ र� read more >>
(मुक्तक छंद) जन्मभूमि में स्वर्ग है, उनके सब संतान। जहां बड़े होते सभी,बनते हैं इंसान। ममता अति रखती सदा,करती निर्मल प्यार_ पाले सबको � read more >>
(मुक्तक छंद) सुबह सुबह जब साथ में,पीते हैं सब चाय। रहे खुशी की शुभ घटा, मिट जाते हैं हाय। आपस में हो प्रेम तब, रहे सुखी परिवार_ फिर जीने क� read more >>
(मुक्तक छंद) होना भी तो चाहिए,पड़ा जेब में नोट। इच्छा सब ही पूर्ण हो, करूं खुशी से वोट। फिर तो सबका साथ हो,मिलती विजय हजार_ देवलोक है तब � read more >>
मुक्तक छंद हारे का हरि नाम है, मन को रखिए शांत। धीरज रखना छोड़ मत,हरि तो हैं अतलांत। होना नहीं निराश है, तृप्त करें हरि प्यास_ पूर्ण कर� read more >>
कविता- अब जाग उठी है तरुणाई। रचना- जितेन्द्र शर्मा पुष्पित हुआ है फिर से उपवन, सुगंध विश्व में फैलाई। चंद्र तारे भर आंचल में, धरा पर � read more >>
आह ! वेदना...... वो सूनी रेलिंग.... अंतहीन इंतजार..... काश! आते तुम और महका जाते मेरी पीड़ा। जाते समय पुर- उम्मीद लौटे तो न-मुराद। हर रोज ही न� read more >>
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