संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 21279 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) मेरे भारत देश में, गजब एकता रूप। बड़े बड़े विद्वान हैं,अच्छे अच्छे भूप। गुण्डों में भी अक्ल है,बड़े निराले ढंग_ मस्ती में रहते सभी,रखते उलफत धूप। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....