संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 21063 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) सुबह सुबह जब साथ में,पीते हैं सब चाय। रहे खुशी की शुभ घटा, मिट जाते हैं हाय। आपस में हो प्रेम तब, रहे सुखी परिवार_ फिर जीने का है मजा, रहते सभी उपाय। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....