कई दफा जिंदगी में ऐसे दौर आते है, जिसमे वो चाहते हुए भी कुछ नही कर पाते है, चले जाते है घर छोड़ कर और मां के हाथ की रोटी खाने के लिए तक तरस ज� read more >>
बहुत अपना है वो, और पराया भी बहुत है
अपना इतना
कि उससे मन की कह लेती हूं
याद आने पर उसकी मुस्कुरा भी लेती हूं
और रो भी लेती हूं
और पराया � read more >>
भेदों की मूर्खता
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जब बिजली पानी एक है,
धरती भी सबकी एक है,
न चांद सीतारें अलग यहाँ,
सूरज भी कहाँ अनेक है,
न अग्नि करती भेद यहाँ,
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