नहीं मिले चाहे मोती लुटाओ, मिले तो टके की सेर।
किसे, कहां, कैसे मिलेगी, है ये मन का फेर।
एक दौलत की सेज पर, गोली खाकर सोता।
दूजा कांटों क� read more >>
बस, वह तो ऐसा ही है।
कहते बुझारत लोगों को, बहुत सुना है।
लोगों ने उसमें क्या देखा, क्या चुना है? लोगों ने उसे खुद भूना, या वह खुद भुना है?
� read more >>