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कविताएँ
बो प्यारा गांव हमारा है ।🙏🙏
बो मेरा गांव निराला है ,जहाँ हमने बचपन गुजारा है । जहाँ मेरा एक दोस्त निराला है उसी गांव का रहने बाल है । बो छोटा सा गलियारा है जहाँ बचप�
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जब बेटी जन्म लेती है
जब एक बेटी जन्म लेती है अपनी बाल लीलाओ से सभी को हर्षित कर देती है । बेटो से कहाँ बेटी कम होती है, हमारे बुन्देलखण्ड में बेटी को देवी क
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इस दिवाली एक नया दीप जलाते हैं
इस दिवाली .. चलो हम सब भी एक दीप जलाते है , अपने साथ किसी गरीब की थाली में भी मिष्ठान सजाते है चलो किसी गरीब की दुकान से दिवाली का सामान ल�
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विशवास
चलते-चलते थक जाते हो, फिर भी बोल न पाते हो। किसी भी तरह से आते हो, फिर भी बोल न पाते हो।। मन में विशवास हो, जीवन में आ�
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है,हम तेरे हवाले ऐ वतन
जख्मी हुऐ मूलक हमारा चिगाड़ी निकली चिखों की आंंखों में भड़ी हुई आंसू हैं, खाली तिजौरी तेरी, है, हम तेरे हवाले ऐ वतन हाथों के जंजीरों
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नज़रों का मिलान
तसली तो देते है, पर साथ नहीं। आगे तो बढ़ते हैं, पर आज नहीं।। पैसा तो कमाते, पर ज़बाब नहीं।। नज़रों का मिलान है, आंखों का बौछार है। बड़े
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ग़लतफ़हमी
साहब, हम ग़लतफ़हमी में जीते हैं। सब मेरे पीछे, मैं किसी के पीछे नहीं। सब मेरे नीचे, मैं किसी के नीचे नहीं। मेरे ही कर्म सच्चे, अन्य के �
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📸...एक सिंह पालत्ता चीत्ता को.. 🕹
हां! नुत्तन राह अधुनात्तन पथ, अज़रों में त्ताज़ का साज़ लिए! चलत्ता विद्या हर पथ कि डगर, कल कि आवाज़ और आज़ लिए!! और सज़ा साज़ अ
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दिखावा हो गई दीवाली
*दिखावा हो गई दीवाली* हमें याद आती है अपने बचपन की जगमग दीवाली कच्चे मिट्टी के दियों से रोशन होती थी दीवाली।। चूने मिट्टी डिस्टेंप�
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कर्म करता चल
कविता -कर्म करता चल कर्म करता चल बटोही, कर्म करता चल राह में कांटे मिले तो, ध्यान देकर चल। जिंदगी के इस सफ़र में कष्ट है हर पल फूल भी �
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अजीब दुनिया
चलती है, दुनिया बढ़ती है दुनिया। किस मोड़ पे खड़ा कर दे, ना समझ है तुम्हे।। मरते-मरते दम टुट जाए ना देबे नीर, ग�
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मा की लोरी
मा जब लोरी गाती है हमको नींद आ जाती है। मा तो कितनी प्यारी होती कविता हमारी ये कहती है।। मा से जब रोटी मांगो तो दो रोटी लाकर देती है। म�
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