कविता‌ ‌‌=‌ ( गुरु )
उंगली पकड़कर चलना !
हमको दिया सिखाएं !!
मात - पिता सर्वप्रथम गुरु !
जो जग में लेकर आए !!
घर पाठशाला सर्वप्रथम !
संस् read more >>
दर्द खुशियों का समुंदर हो..जाए
दर्द खुशियों का समुंदर हो..जाए
अगर तुम साथ हो...!!
जिंदगी ख्वाबों का अंबर हो..जाए
अगर तुम साथ हो...!!
मैं ब� read more >>
रुकी हुई सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत है
बंजर हुई ज़मीन तो क्या, ऊपर आसमान बहुत है |
छु लूँ हर एक सितारे को, इसी कोशिश में हूँ
आजकल, चूका 4 � read more >>
मिलन...
जागकर रात विताऊं ,
या ...यूहीं लौट जाऊं,
कैसे कहूं ये चांदनी,
तुझे कैसे पास बुलाऊं.,
तुझसे मिलने को आतुर मैं,
खुद के साये से डर जाऊं read more >>