एक ,चेहरा नहीं ,लिख ,पाती हूँ,।
मगर ,साए से यह ख्वाहिशें ,मन ही मन ,
फिर वहीं ,याद गुनगुनाती हूँ,
निश्छल ही यह प्रेम ,अधुरा कहाँ,रहा,।
मगर भट� read more >>
कविता = ( उदर कुंड )
उदर कुंड में क्यों धधकाई !
भूख की यह प्रचंड ज्वाला !
सब कुछ हुआ सुहा मेरा !
किस -‌ किस का दूं हवाला !
बस कश्मकश रोटी की !
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कविता = ( दरकार )
निष्काम सेवा से नहीं चलता परिवार !
पेट को रोटियों की है दरकार !!
खाली ख़ज़ाना नहीं चलती सरकार !
भूखे पेट भजन कैसे होए मेर� read more >>
समसामयिक व्यंग रचना......
# नशा मुक्ति अभियान .....
कहीं कार्यक्रम था
नशा मुक्ति का
इसे छोड़ने की ,
अचूक युक्ति का .....!
मंच पर नेताजी ,
जनाब � read more >>