# सुप्रभात....
जो चाय ,
सुड़क कर पीते ...!
जो दारु ,
जाम पे जाम ...!
छल्ले उड़ाते ,
कश लगाते हुए
जो लेते ,
प्रभु का नाम ...!
जो ना छोड़े
ये आदत ...!
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कविता = (अखण्ड भारत )
हिंदी तब मातृभाषा कहलाएगी !
जब हिंदी घर-घर पूजी जाएगी !!
सरकारी महकमों में हिंदी !
जब लिखी बोली जाएगी !!
भाषाओं की तु� read more >>