रुकी हुई सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत है
बंजर हुई ज़मीन तो क्या, ऊपर आसमान बहुत है |
छु लूँ हर एक सितारे को, इसी कोशिश में हूँ
आजकल, चूका 4 � read more >>
मिलन...
जागकर रात विताऊं ,
या ...यूहीं लौट जाऊं,
कैसे कहूं ये चांदनी,
तुझे कैसे पास बुलाऊं.,
तुझसे मिलने को आतुर मैं,
खुद के साये से डर जाऊं read more >>
Technology की देन तुम थे
वरना इस भीड़ में, एक दूसरे से परे इस दुनिया में,
शायद ही कभी हम टकराते, हाँ शायद टकराते भी,
पर रुक कर आँखों से आंखें शा� read more >>
तुम्हारे हिस्से की वह हरी,पीली,
लाल, काली,चूड़ियों के वे टुकडे़
आज भी रखे है ...!
तुम्हारे लिए...
जिनके लिए तुम लड़जाया करती थीं,
अपने तेज read more >>
ढलती शाम...शीर्षक
कौतुहल से दूर ढलती संध्या ,
समेटती प्रकृती अपने करतलों को...!
घर जातीं गाय धूल उडा़ती ,
बछडो़ को पाने सुख रभांती ..!
आसम� read more >>