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कभी तुम से_ तो कभी अपने आप से दिल की गहराई से, मिला करतें हैं! हर रोज, वनाया करतें हैं सपनों का महल, हर रोज गिराया करतें है! यू.एस.बरी ग्� read more >>
वो अर्द्ध देती उपासना -सी वुद्ध की विपासना-सी वो स्त्री ही तो है...! यू.एस.ब� read more >>
कविता -गांधी हे! मानव तू सीख सीख ले बापू जैसे इंसानों से मानवता से निर्मित तन मन सत्य अहिंसा इमानों से, संत पुजारी देशभक्त तू जनहित read more >>
1 हैं लाख चाहत्तें ले कर के, स्वाधिनत्ता पथ हो के आज़ाद चलें! अब चलो चले कर मन स्वत्तंत्र, बनने स्वत्तंत्र निष्ठा: चलें!! 2 read more >>
क्या तुम्हें याद नहीं कितने बिताए लम्हें साथ छोड़ के तुम चले गए ऐसे मेरा हाथ अब पास मेरे कुछ नहीं सब ले गए तुम अपने साथ। धन्यवाद read more >>
कुछ गोलियां लगी थी पैरों में फिर भी सोच थी कि रुकना कहा ज़रूरी है घुटने अभी ज़मीन पर गिरे नही देश भक्ति अभी अधूरी है वो धरती कितनी रो� read more >>
है मिली रौशनी अंधेरों को, बन सुर्य प्रभा का ऊदय हुआ! बन दिनकर और दिवाकर स्पनें त्तेज़वान, अपना वक्त सत्तीरों कि लड़ीयों सा!! read more >>
नमस्कार । मैं उपस्थित हूं एक नई कविता से के साथ और मैं इस कविता में बताऊंगा कि अपने ऊपर विश्वास होना चाहिए और खुद पर विश्वास होना तो बड� read more >>
वो मेरे स्कूल का पहला दिन था बारिश हो रही थी और स्कूल बस दरवाज़े पर खड़ी थी मेरी ज़िद थी की मुझे नहीं जाना और न जाने क्यों माँ ज़बरन भेजन read more >>
है पन्नों कि धार - धार, लेकर विचार मानवत्ता का! और ज्ञान - मान के पथ से चली, करत्ता स्वर्णिम प्रारूप हर जर्रों का!! जो रक्त से ले� read more >>
कविता = ( मातृभाषा ) हमारे एक भूतपूर्व नेता जी ने ! हिंदी दिवस मनाया ! पंडाल के बाहर ! हैप्पी हिंदी डे का बोर्ड लगवाया ! मुख्य अतिथि के रूप read more >>
शीर्षक (गुज़रा ज़माना) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) वो गुज़रा ज़माना बहोत याद आता है। जब माँ के गोद में बैठ के खाना खाते थे, पिता के कंधे प read more >>
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