जिन्दगी चलती है चलते रहो,
वक्त के साथ थोड़ा बदलते रहो ...
राह मुश्किल भी निकल जाएगी,
ठोकरें खा के भी थोड़ा संभलते रहो...
अंधेरा तो जुगनू स read more >>
शीर्षक (गर्मी का मौसम)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
उफ़ ये गर्मी हाय ये गर्मी।
उफ़ ये कैसी गर्मी है,
चारों तरफ ही आग है,
ये सब गर्मी का ही read more >>
# सुप्रभात .....
यत्र - तत्र - सर्वत्र ,
व्याप्त यहां विज्ञान ...!
तन , मन , प्राण , आत्मा ,
ये जीवन के चार आयाम ....!
आओ जाने इसे हम ,
आखिर क्या है आत� read more >>
दर्द तो होता है!
मगर दवा नहीं आती!!
शिकवे हैं बहुत उससे!
मुझे शिकायतें नहीं आती!!
तकलीफ है, रूह है, ये उसकी!
कम्बख्त मेरी जान भी नही read more >>
**मन*
मन चंचल है तुम ये जानो
मन की शक्ति को पहचानो ।
मन की गति का अंत नहीं है
ये तुम अपने मन से जानो ।।
मन की भाषा समझ सको तो
मन से उसका अर read more >>