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पलाश के फूल
कविता- पलाश के फूल बसंत ऋतु में खिल गया ब्रह्मावृक्ष, लाल,सफेद और पीले रंग के फूल। खेतों के मेढ़ में जंगल की आग जैसे, अर्धचंद्राकार,छो
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प्रेमिका गौरैया
कविता- प्रेमिका गौरैया फुदक-फुदक कर चलती हो, मानो चलती हो विश्व सुंदरी। उन्मुक्त गगन में उड़ती हो, जानु कोई परी,अप्सरा स्त्री।। सरस
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रंगों की होली
कविता- रंगों की होली आ तुझे प्रेम रंग में रंग दूं मेरी राधा डालूंगा रंग कभी थोड़ा कभी ज्यादा गोकुल की गलियों में धूम मची है नव गीतों
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अब करो तैयारी जीत की
कविता- अब करो तैयारी जीत की सोते हुए जन अब जाग जा, तुम छोड़ दो राहें प्रीत की। आ गया है परीक्षा की घड़ी, अब करो तैयारी जीत की।। याद कर प�
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चक्कर
चक्कर है साहब, पड़ ही जाता है। राई का बन जाता पहाड़, गढ़ी बन जाता है गढ़। पाठा का नाटा बन जाता, पहाड़ का बने कंकड़। मकड़ी फंसती मकड़ -जाल,
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जयति मां दुर्गा भवानी
कविता- जयति मां दुर्गा भवानी जयति मां दुर्गा भवानी, अष्ट बाहु सहस्त्र रूप धारिणी। रोग,शोक, पाप नाशिनी, असुर महिषासुर संहारणी।। काल,अ�
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श्रीराम
कविता- श्रीराम हे!रामचंद्र अयोध्या भूपति, पतित-पावन, दीन दयालु। वैदेही वल्लभ विश्व व्यापी, मर्यादा पुरुषोत्तम कृपालु।। नीति नियम
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वर्धमान
कविता का शीर्षक- वर्धमान संसारिक माया से विरक्त हुए अतिवीर। राज वैभव त्याग किया राजपुत्र वीर।। कठिन तपस्या से हासिल किया ज्ञान। सन
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जय हनुमान
कविता- जय हनुमान जय अमृतेश आशुतोष रुद्रावतार, पवनपुत्र,केसरी और अंजना लाल। विपुल बलशाली राम भक्त हनुमान, मंगल दिवस प्रगट हुए स्वरू�
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धरती मां
कविता- धरती मां तू ममता की मूरत है मेरी माता की सूरत है जननी जन्मभूमि मां मुझे तेरी जरूरत है मां की पेट से निकल मैं हो गया था विकल अप�
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आत्मज्ञान
कविता- आत्मज्ञान शुरू कर रहा हूं जीवन का पहला अध्याय, सुख और दुःख का पाठ अब मुझे पढ़ना है। बार-बार करूंगा अभ्यास एक ही विषय को, कर्म और
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प्रेमालिंगन
कविता- प्रेमालिंगन देख कर तेरी चंचल जवानी, लिख रहा हूं मैं प्रेम पत्रिका। तुम हो कुसुम मन बगिया के, मैं मधुप दीवाना खुशबू का।। तेरी
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