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कविता का शीर्षक- प्याऊ घर दोपहरी भीषण तपती गर्मी, जब आग बरसाता है सूरज। राहगीर का मुंह सूख जाता, प्यासे हैं अनुज और अग्रज।। पानी लेक read more >>
कविता का शीर्षक- जंगल जलेबी कलित मोहिनी जंगल जलेबी, तेरी ओर खिंचा चला जाता हूं। देख तुम्हारे लाल-लाल बदन, पाने को हर पल ललचाता हूं।। read more >>
कविता- तुम आगे बढ़ो शिक्षा में तुम आगे बढ़ो, तुम बढ़ो आगे खेल में। प्रतिभा को तुम दिखादो, तुम बढ़ो आगे मेल में।। नृत्य में तुम आगे बढ� read more >>
शीर्षक (रोहित शर्मा) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) हिट हो तुम फिट हो तुम। सबसे जादा प्रसिद्ध हो तुम । रिकॉड पे रिकॉड है तुम्हारे नाम� read more >>
नादान था ऎ दिल कुछ समझ न सकें वो किसी और की तारीफ करता रहा हम खुद की तारीफ समझ मुस्कुराते गए। नादान था ऎ दिल कुछ समझ न सकें वो किसी और � read more >>
रूको नहीं बाधाओं से, तु बढ़त्ता चल, तु चलत्ता चल! रूकों ना घीरीं घटाओं से, तु बढ़त्ता चल तु चलता चल!! तु चल कि मंज़ीलें थमीं मि� read more >>
यादों की पुरवाई लौटती है,न ,जब । भीगता है,इक साफ सा कागज ,। और कुछ आहत ऐसी बरसती है,। जो एकाएक टपकती है ,और बरसती है,। मगर यह नहीं रूकती किस read more >>
दूर तक धूप फैली थी, बदली से आ गई छाया। इसे अब दूर सिंधु से उठाकर कौन लाया। वात भी चल रही ठंडी, दल झूम रहे सारे, सरिता तट खड़ी नौका केवट बै� read more >>
तुम चाहो तो जाकर देखो, उस गिरते पत्ते को , जो टहनी से टूट रहा है बरसों से था कैसा नाता, पल भर में जो रूठ रहा है। तुम चाहो तो जाकर देखो, उन फ� read more >>
एक छोटी सी बात है! तुम्हें आज बता दूं क्या!! जज्बातों का सैलाब हो तुम! दिल मे तुम्हें बसा लूँ क्या!! कुछ देर बैठो पास मे  साथ मे! � read more >>
शीर्षक (अभी बाकी है) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) सांसे रुकने को है,पर कुछ काम अभी बाकी है। यमराज से बोल देना थोड़ा रुक कर आये। क्योंकि read more >>
कविता का शीर्षक- सावन सुन्दरी आ गया सावन का मधुमास पल, नारी की लहराने लगी हरित चुनरी। सज-धज कर सोलह श्रृंगार करके, मन-मगन नाच रही सावन � read more >>
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