यादों की पुरवाई लौटती है,न ,जब ।
भीगता है,इक साफ सा कागज ,।
और कुछ आहत ऐसी बरसती है,।
जो एकाएक टपकती है ,और बरसती है,।
मगर यह नहीं रूकती किस read more >>
दूर तक धूप फैली थी,
बदली से आ गई छाया।
इसे अब दूर सिंधु से उठाकर कौन लाया।
वात भी चल रही ठंडी,
दल झूम रहे सारे,
सरिता तट खड़ी नौका केवट बै� read more >>
तुम चाहो तो जाकर देखो,
उस गिरते पत्ते को , जो टहनी से टूट रहा है
बरसों से था कैसा नाता, पल भर में जो रूठ रहा है।
तुम चाहो तो जाकर देखो,
उन फ� read more >>