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कविताएँ
मैं जुगनू होता तो
जुगनू के जैसा हम होते तो कैसा होता दिन में जागते रात में चमकते न अँधेरे का डर न खौफ होता जाहा पाते जाते न किसी का भैये न कोई रोकने �
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जहा चाह है वहा राह है
जहा चाह है वहा राह है ज़िन्दगी में बस आगे बढ़ो रास्ता खुदा देगा आत्मविश्वास दढ़ता धैर्य हमारे सच्चे मित्र है जहा चाह है वहा राह है बस �
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रोटी की महक
कविता -रोटी की महक महकते रोटी का मंज़र,अजीब होता है मगर कहां ये सबको नसीब होता है इस कस्तूरी के चक्कर में घूमती है दुनिया कोई बड़ा नस�
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हर बात बिगड़ क्यों जाती है
मैं कोशिश करता ‌हू पर हर बात बिगड़ क्यों जाती है। खुशियां मेरे जीवन में आने से पहले फिसल क्यों जाती है। मैं करना चाहता हूं सब अच्छा प�
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माता पूजा
खड़गपुर का प्रसिद्ध पूजा माता पूजा यूं तो वहां अनेक पूजा धूमधाम और बेमिसाल होती है लेकिन इस पूजा की तो बात ही कुछ
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शीर्षक (फूल)
शीर्षक (फूल) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) फूलों ने खुशबू फैलायी। चारो तरफ ख़ुशहाली आयी। फूल लगते है सबको प्यारे। है वो सबके राजदुलार
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वर्षा ऋतु
** वर्षा ऋतु ** वर्षा की ऋतु आ गई है काली बदरी छा गई है ।। ठंडी ठंडी हवा बह रही सबके मन को लुभा रही है।। अपने पानी की बूंदों से प्यास धरा
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शीर्षक (नज़र)
शीर्षक (नज़र) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) नज़रों की अपनी एक अलग ही भाषा है। एक अनकही सी अनसुलझी सी परिभाषा है। वो हमसे नज़र मिलाने से
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माटी का शरीर
क्यों घमंड है तुझे ऐ माटी का शरीर मेरा-है-मेरा, कहता है कल ना जो तेरा है कुछ भी तो ना लाया था तूने कुछ लेकर भी ना जाएगा रो के आय�
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जिंदगी की राहों में
जिंदगी की राह में समय के साथ जख्म मेरे भर गए अब लौटकर मेरा हाल पूछने ना आना जब जख्म के निशान भी मेरे ना रहे समय के साथ कुछ बदलाव भी जर
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🤚 नई पहचान 🌷 हिन्दुस्तान ✍️
है नई पहचान मेरी, और नया ये जहान है! गुल से हैं रौशन गुलिस्तां, शीद्दत के पथ परवान है!! है जहां मेहफ़ुज़ ज़ो, गुलशन को सी�
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करें योग रहें निरोग
कविता -करें योग रहें निरोग यदि जीवन में योग करेंगे जीवन भर निरोग रहेंगे। चिंता मन से दूर भगेगा तन सेहत मजबूत बनेगा स्वस्थ कुशल प्�
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