कौन कहता है कि मां सिर्फ धरती पर हो तब साथ होती है.....
हमारी पहचान उसके संस्कारों से होती है.....
उसकी आवाज हमारे दिलो में धड़कनों को तरह हो� read more >>
शृंगार छंद "तड़प"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।
नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।
बहुत ही तड़पी करके याद।
सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।
सदा तारे गिन का read more >>
मुनासिब नहीं मेरा किसी पर भी बरस जाना,।
मैं उस पगडंडी पर ,बिना धाप किए चल रही हूं,
जहां एक कांटा कुरेदता है , मेरी कदमों के तलवे को,मगर
को read more >>