# अव्यक्त ...
हुआ बहुत ही धोखा ,
इसमें ऐसा ही होता ...!
कहीं-कहीं रात चांदनी ,
कहीं अंधेरा होता ...!
प्रेम ग्रंथ के पन्ने खोलूँ ,
लिख लूं अपनी � read more >>
जब तू था दिल में
तो तु ही था
अब जब तू नहीं तो
तू भी नहीं
जब तू था तो इश्क भी था
प्रीत संगीत संस्कृत मीत भी
अब जब तू नहीं तो ये सब
पल पल ह� read more >>