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प्रकृति अनुपम कृति हैं, यह इसकी पहचान है। कहीं पेड़ों की छांव में, पक्षी बैठे शान्त से कहीं अपनी चोंच खोले, ध्वनि करते आन से। कहीं बरसा read more >>
ये समाज एक तेज तलवार है इसमें जीत भी हार है। इंसानियत तो अब कही है ही नहीं हर तरफ बस लोगों में तकरार है ये लोग जो हैं बड़े होते बेरहम ह� read more >>
शीर्षक (पिता) मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर माँ का प्यार तो तुमको याद रहा। क्या पिता का प्यार तुम भूल गये। एक पिता को समझना आसान नही पि� read more >>
चांद तू क्या था, क्या हो गया? भारी- भरकम पेड़, बुढ़िया सरसर सूत कातती। बैठी बूढ़ी आंखों से, जवां जहां को ताकती। बच्चों को बहलाती मां, चा� read more >>
लिखती और गुनगुनाती जा रही हूँ हसीन कहानियाँ तेरे संग मेरे यारा याद आ रहे हैं वह पल जब दुल्हन बनाई थी घर संग तेरे मेरे यारा दुःख-सुख ह� read more >>
सही- गलत, गर्हित , सहल हो लिए साथ। मूसलधार हो रही, छल-छंद की बरसात। कठिनाइयां कह रही, तू डाल मैं पात। अवसर तुझसे कह रहे, नाप तेरी औक़ात। छ� read more >>
आया फिरंगi आया, लूटा दोनो हाथों से ।। तब आई लक्ष्मी बाई, स्वतंत्रता की पहली चिंगारी थी उसी ने जलाई। मंगल पांडे ने प्रथम स्वतंत्रता सैन read more >>
आज मेरे अपने मेरे खिलाफ खड़े है। पर, मेरे दादाजी के संस्कार मेरे साथ खड़े है। आज जब मै पिछे मुड़कर देखता हूँ तो बचपन के वो हसिन दिन दादा क� read more >>
दोहा- किस्मत के पन्ने खोखले, लिख तु कर्म मसि लेत। अधर्म सुं दुख अपार है, सद्कर्म सु फल देत। read more >>
रिश्तों के धागे में मैं बंधा, बहती हुई नदियों की तरह मन बह रहा तुलसी तुम से मिले बिना चाचा का अब रिश्ता टूटा सा लग रहा, एक मासूम सी कल read more >>
प्यारे भैया भाभी आपको सादर प्रणाम/ मिले दुनिया की हर खुशी तुमको मिले अपनों की हर दुआ तुमको हस्ते रहना तुम सदेव जियो जीवन तुम ने� read more >>
उन अँधेरों का उड़ना सक्त मना हे जो दीवों मे जलकर भुना हे / उन गलियों में अँधेरों का गुजरना सक्त मना हे जो अन्ध बनके चला हे/ read more >>
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