फंसाने को, हर जगह है दाना -पानी।
यह दुनिया, बड़ी चूहेदानी।
हर जगह, बिखरा कपट- कण।
पल-पल, क्षण- क्षण।
सेज हो, चाहे रण।
दिखती बटेर, निकलता फण read more >>
किसी को नाम, किसी को लाभ, कोई मरा गुमनाम।
किसी पर पूरा देश रोया, किसी पर मचा गिद्ध क़ोहराम।
बंटे बताशे, फला-फूला, मिटा नींव बन जाने को।
आ� read more >>