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कविताएँ
दो को एक बनाते देखा ।
वह सबसे अच्छा फूल लगता है अब पर न जाने कितनी बार जिया है मर मर कर ,
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छात्र जीवन..
छात्र जीवन.. जीवन के स्वर्णिम दिन थे तुम... कई ख्वाहिशें पन्नों में अधूरें रह गईं.. खूबसूरत सफऱ और बेहतरीन वक्त थे तुम. कई हसीन चहेर�
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उन्हें उनके ख्वाब में रहने दों...! मुझे मेरी हकीकत पसंद है...!!
उन्हें उनके ख्वाब में रहने दों...! मुझे मेरी हकीकत पसंद है...!! उन्हें उनके श्रृंगार में रहने दों..! मुझे मेरी सादगी पसंद है...!! उन्हें उन
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आओ मिल जाएं हम
आओ मिल जाएं हम सुगंध और सुमन की तरह। एक हों जाएं चलो जान और बदन की तरह। मेरे जीने की तो सूरत है सूरत तेरी - रात_ दिन स�
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दिल पर किसका जोड़ है
दिल पर किसका जोड़ है, दिल के आगे हर कोई हारा। आलीशान कर दे मुझे तूँ ,मेरी जिंदगी में आकर ओ य़ारा। मैँ ने हज़ारों रंग के सपने बुने ह�
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बदली झुकी पर्वत पर
बदली झुकी पर्वत पर,भँवरे चमन में डोले। मोसम है मिलन का,बुलबूल फूलों से बोले। ये वक्त नहीं है इन्तजार का, ओ साथी मेरे_ तूँ कमसिन
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दिल पर किसका जोड़ है
दिल पर किसका जोड़ है, दिल के आगे हर कोई हारा। आलीशान कर दे मुझे तूँ ,मेरी जिंदगी में आकर ओ य़ारा। मैँ ने हज़ारों रंग के सपने बुने ह�
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आजकल रात भर
आजकल रात भर, नींद आती नहीं। एक पल के लिए, याद जाती नहीं। जीना तेरे बिन, दुश्वार हो गया_ दूजा कोई भी, शक्ल भाती नहीं।। (स्वरचित मौलिक) संद
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बदली झुकी पर्वत पर
बदली झुकी पर्वत पर,भँवरे चमन में डोले। मोसम है मिलन का,बुलबूल फूलों से बोले। ये वक्त नहीं है इन्तजार का, ओ साथी मेरे_ तूँ कमसिन
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हार हुई सच्चाई की
हार हुई सच्चाई की, झूठ की हो गई जीत। आज तेरे संसार की, सारी उल्टी हो गई रीत। प्रयास करने वाला हार रहा है,निठल्ले ले रहे मौज- कैसा �
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राम मंदिर निर्माण
अयौध्या, विराजे रामलला। 2019 में, आया कोर्ट फ़ैसला। मिटा तारीक, निर्माण व्यस्त सारा अमला। मोदी सामने मोम है, हर बला। राम जन्मभूमि �
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हुँ। मैं गुमनाम
हुँ। मैं गुमनाम मुझे गुमनाम रहने दे। ना कर बदनाम थोड़ा मेरे नाम तो रहने दे। मिला हुँ।मै अब खुद से थोड़ा मेरे ये गुमान तो रहने दे। हुँ�
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