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कविताएँ
ज़ालिम जींदगी
ज़ालिम जींदगी हमें ये गम दे गई। हमें मुकदर में कई बेहिसाब सितम दे गई। नम है ये आंखे इन आँखों में मेरे ख़्वाबों को ले गई मुकमल ना हुआ जो �
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राजस्थान की झलक
मिलती है। मेवाड़ की पाग में, जौहर की आग में। पन्ना के त्याग में, अकबर की लाग में। जयमल पत्ता के रण में, हाडा़ रानी के पण में। मातृभू�
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बचपना खो गया है
आज़ का समय ये कैसा आ गया है बच्चों का बचपना कहां खो गया है पराग चंदामामा नंदन चंपक वेताल बाल भारती चाचा चौधरी लोटपोट आज कोई भी बच्चा �
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बतला रहा हूँ में
तुम गीत हो मेरी , तुम्हें गा रहा हूँ में तुम प्रीति हो मेरी ,ये बतला रहा हूँ में जमाने को मोहब्बत का, किस्सा सुना रहा हूँ में
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पीछे मिलती है हाला
नियमों का पालन भी करती है मधुशाला , आगे दरवाजे पर ताला पीछे मिलती है हाला । .. I
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सतकाम
सारे धाम की तिरथ कर लो ना आएगा कुछ भी काम माता पिता के चरण जो सेवे वह ही पुण्य सतकाम।
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हाथ बटाना काम नहीं
करने को तो सब कहते है पर करते कोई नहीं राय बताना काम है जग का हाथ बटाना काम नही
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मां तुझे सलाम
1 ____________ मां, तेरा स्नेह अनमोल है, तेरी ममता का कोई मोल नहीं। तू है जीवन का सार, तू है आधार, तेरे बिना हम सुना, अधूरा है। तेरे आँचल में मिल�
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वेदना
शब्दों में तुझको उतारा, हुआ प्रेम जब मेरा विह्वल। मालाओं में तुझको पिरोया, तेरी एक निर्णय ने, मेरा सब कुछ छीना। पड़ी गांठ जब दिल पर मे
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हुनर
दर्द सहने की आदत, कुछ इस तरह हो गई। सुबह का दर्द शाम तक, पुरानी हो गई। क्या तोड़ोगे टूट कर, निखरने वालों को। आग की तपिश भी, अब शीतल लगने
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बीते दिन
बैठी दहलीज़ पर शून्य में निहारती। प्रश्न अनेकों मन में कौंधती, खुद से ही बातें करती। निरुत्तर हो रह जाती, बीते दिनों को याद करती। खु�
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कुछ सवाल
इस मसले का हल कहाॅं से लाएं? जो नहीं तकदीर में उसे किससे लिखवाएं? बंधे रह जाते हैं मन्नतों के धागे, धागों में बंधने की तकदीर किससे पाएं?
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