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भारती,जय विजय करे। कनक शस्य् कमल धरे । लंका पदतल सतदल, गर्जितोमिरृ् सागर - जल धोता शुचि चरण युगल स्तव कर बहु अर्थ भरे ! read more >>
दुनिया बेईमानी का खाती है, पर ईमानदारी पूजने वाले भी तो हैं। लोग झूठ के घाट पर नहाते हैं, पर सत्य दरिया में उतरने वाले भी तो हैं। लोग � read more >>
हे! कलम लिख हे! कलम तू झूठ को झूठ सांच को सांच लिख, तेज तलवार से भी तेज बात को बात लिख। सफ़र हो दूर कितना भी मगर जज़्बात लिख, भरोसे से � read more >>
(ऑफिस के किस्से ) हास्य कविता ऑफिस में हम गए थे बड़े शान से, सोचा था कि बुढ़ापा कटेगा आराम से। पहला दिन जब पहुँचे हम वहाँ, बॉस ने दे दि� read more >>
सावन का मौसम आया फिर याद तुम आए हो जितना दूर करती हूं तुम्हें खुद से उतना ही करीब आए हो Saawan ka mausum aaya Phir yaad tum aaye ho Jitna dur karti hun Tumhen khud se Utna hi karib aate ho ओ पह read more >>
भीष्म तेरी प्रतिज्ञा क्या.....? तेरी गौरवगाथा के काम आई मृत्यूस्या पर लेटे-लेटे प्रायश्चित के आंसू ....से शन्न था हृदय जीवन में क्यों प read more >>
पर्व, अपना , ये पावन देखों .....! मेरे भारत में सावन देखों.....! रिमझिम- रिमझिम बारिश की बुंदों में इठलाती - बतियाती खिलखिलाती सुन्दर - सुन्दर read more >>
बसंत बहार की न जाने क्यों हर साल ये हजारों फुल खिलाती है ।। पेड़ो की हरी-हरी टहनियों पर भंवरों को बुलाती है ।। ये आदत इस की या कोई शौक � read more >>
हजारों खेल खेले हैं । हमने इस बालू रेत पर.........!! वो खेल आज की उलझनों से अच्छे थे । बड़े नहीं उस वक्त हम बच्चे थे ।। वक्त की उड़ान और क्या - � read more >>
दादी की दादागिरी, सबसे प्यारी है , बच्चों की भीड़ में, वो सबसे न्यारी। दादी की कहानियाँ, मजेदार और लंबी, उनकी गोदी में बैठ, सुनते हम सभी। read more >>
उम्मीद के इस जहां में,ये संघर्षों का दौर कुछ हमसे कहता है।, सुन यहां ये अफवाहों का शौर कुछ हमसे कहता है। यूंही नहीं बनती , कभी किस्मते� read more >>
अच्छे-अच्छे वक्ताओं की, हुई बोलती बंद। बजरबट्टू हो रहे, समझते थे अक्लमंद। नज़रों से नज़र चुराकर, हो गए नज़रबंद। तर्क का निकालते अर read more >>
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