स्वरचित रचना- मरना है तो खा के मरो.......!!!
रचनाकार---महेश कुमार
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इस धरती पर बोझ बने जो,
उनका यही तराना है!
कि, मरना है त� read more >>
ऐ जिंदगी यूं परेशान न कर,
मुझे अपने सपने सजोने दिया कर,
रोज़ सजाती हूं अरमानों को अपने,
कम से कम उन्हें टूटने तो मत दिया कर,
थक चुकी हूं ल read more >>
दर्द क्या होता,
जानना हो तो पूछो उस आशिक से जिसने सब कुछ लुटाकर भी, सब कुछ खो दिया है, उस दीवाने से पूछो जो अपनी माशूका की याद में बिता दिए read more >>
कविता = ( गुमान )
इस शरीर पर मत कर गुमान !
यहाँ पल दो पल का तू मेहमान !!
इस शरीर का मत बन दीवाना !
माटी में इसको मिल जाना !!
दुखियों के जो आए क� read more >>
इंतज़ार करना हमें बहुत कुछ सिखा देता है, कभी रोते हुए नेत्र से बहते दुख के निर्झर, दर्द भरी पीढ़ा वदन में समाए,
यह दर्शा देता है कि तुम भ� read more >>