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मंक्षिका

Samir Lande 03 Sep 2024 कविताएँ प्यार-महोब्बत मंक्षिका समीर लांडे samir Lande 36543 1 5 Hindi :: हिंदी

एक मक्षिका नेहमीच तिच्या 
चेहऱ्या भवती तिला त्रास देते ,
आणि रोगाची साथ माझ्या हृदयात पसरते.
बरोबर फुलांवर बसलेल्या भौऱ्या प्रमाणे ,
मक्षिका तिच्या चेहऱ्यावर बसते .
जणू तीच हवी तिला, गोड , मधुर ,
मक्षिका कुठे कडू आणि कोढ्यावर बसते.
गोंडस हसणं , फुलांस दिसणं ,
मक्षिका ही तिच्यावरच मरते .

कवी :- समीर लांडे

Comments & Reviews

tintoiya siraj
tintoiya siraj read.......

1 year ago

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