Jyoti yadav 13 Nov 2024 ग़ज़ल अन्य दरवाजा मेरा मुस्कुरा के खट खटाई 48025 0 Hindi :: हिंदी
बड़ी फुर्सत से भाई दुज आई दरवाजा मेरा मुस्कुरा के खट खटाई,। मशरुफ थी मैं तेरी यादों में, इस लिए उसे अन्दर नहीं बुलाई,।।।। आवाज लगाई वो दहलीज से, बात करी फिर तमीज सें,। कब मुझे अंदर बुला ओगी , कब आएगा भाई तेरा मिलकर अपने अजीज से,। क्या है पास तुम्हारे मनाओगी तुम उसे किस चीज से,।।।। मैने उससे कहा रुठे नहीं हो तुम हमसे,। तेरी राखी हुं मैं लौटोगे तुम कसम से,।।।। फिर नजर भर के देखी हमें नजर मे अपने तेरी मेरी तस्वीर बनाईं,। हम चारों साथ खड़े , मस्तक पर तिलक तुम दोनों के मेरी राखी से सजी तेरी कलाई,।। बड़े फुर्सत से भाई दुज आई दरवाजा मेरा मुस्कुरा कर खटखटाई मशरुफ थी मैं तेरी यादों में इसलिए उसे अन्दर नहीं बुलाई,।।। विनय यादव ज्योति यादव के कलम से कोटिसा विक्रमपुर सैदपुर गाजीपुर उत्तरप्रदेश