संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत मेरी ग़ज़ल पढ़कर आप पाठक गन प्यार का इजहार करने में संकोच नहीं करेंगे. प्यार =मोहब्बत की बारीकियों से रुबरू होंगे. आप पाठक गन का हार्दिक स्वागत है. 482 0 Hindi :: हिंदी
*ग़ज़ल* ख़ुशामद बराबर किये जा रहे हैं ख़फ़ा मुझसे होकर वो पछता रहे हैं निगाहें उठाकर जो देखा तो जानम ख़िरामाँ ख़िरामाँ चले आ रहे हैं क्या इसको मुहब्बत का इकरार समझूंँ वो इज़हारे - उल्फ़त पे शरमा रहे हैं तकाज़ा है मौसम का बरसेंगे बादल उधर उनके जलवे गजब ढा रहे हैं लिखी उनकी आँखों में है जो इबारत मिला कर नज़र हमको पढ़वा रहे हैं जिन्हें हम से मिलने की फ़ुर्सत नहीं थी तराने हमारे वही गा रहे हैं हैं वाक़िफ सभी रास्तों से ही संदीप हमें आप ना हक़ ही समझा रहे हैं (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....