संदीप कुमार सिंह 10 Aug 2026 ग़ज़ल समाजिक मेरी यह ग़ज़ल विश्व में धर्म के स्थापना के लिए है. लोगों का धर्म के प्रति श्रद्धा बनी रहे. पापियों को धर्म की शक्ति से डरना चाहिए. 2895 0 Hindi :: हिंदी
ग़ज़ल 212,212,212,22 सत्य जलता नहीं है जलाने से। पाप धुलता नहीं है नहाने से। प्यार है तो खुशी है जहाँ में बस। जिन्दगी कुछ नहीं है सताने से। फूल बन कर रहो आप तो साथी। ज़ख्म भी हस पड़े खिलखिलाने से। अंत तो है सभी का यहाँ समझो। पुण्य से ही मिले बल जमाने से। लोभ बिन जो भला यदि करे सबका। सुख मिले धर्म को ही कमाने से । आज बदले हुए इस जगत में तो। झूठ का राज है हर घराने से। दुष्ट घुमते यहाँ खौफ बिन हर पल। हक मिले हौसला को जगाने से । हाँ खुशी ना बिके हैं दुकानों में। है खुशी नेह को ही बढ़ाने से । काम संदीप सा गर करे जो सो। वह डटे मोड़ हर पर मस्ताने से। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....