संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2026 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत मेरी यह ग़ज़ल दिल के दर्पण में समाने वाली है. आप अपने प्यार का इजहार इस ग़ज़ल के माध्यम से बहुत ही बखूबी कर सकते हैं. 83 0 Hindi :: हिंदी
एक नज़र देखा तुम्हें और मुहब्बत हो गई, धड़कन बन के तुम मेरी ज़रुरत हो गई। साड़ी पहन कर जब तुम निकलती हो जानू, सड़क तुम्हारी खुशबू से खूबसूरत हो गई। आलिशान तुम्हारे जीने के ढंग को देखकर, इन नजारों को तुमसे बेहद उल्फ़त हो गई। चाँदनी की आब लिए हुये है तेरा रुख़सार, देखकर नीरस छाती भी बदमस्त हो गई। रात में तुम नज़र आ गई दिल बेकाबू हुआ, सुबह होते_होते तुम मेरी किस्मत हो गई। आज लोगों ने मुझे अकेला देखा तो तुम्हें पूछा, ऐसा लगता है की अब तुम मेरी अस्मत हो गई। आज दर्पण में खुद को देखा तो तुम नज़र आई, तुम्हारे बिना मेरी जिन्दगी अब ग़फ़लत हो गई। बेवफा जहां भी रहो मेरी दुआ है तुम खूश रहना, आह मेरे आने से पहले लाश तेरी रुखसत हो गई। शायर संदीप की गज़ल में तुम आभा जैसी हो, तुम्हारी जवानी के नशा में मुझ से शरारत हो गई। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....