नागमणि कुमार सिंह 27 Aug 2026 कहानियाँ समाजिक अंग्रेजी 1534 0 Hindi :: हिंदी
शीर्षक : अंग्रेजी बात उस समय की है जब मणि बिहारशरीफ़ में रहकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था I उसका छोटा भाई सूर्य दमन दीव में प्राइवेट कंपनी में काम करता था I मणि का पढ़ाई का खर्चा तीन तरह की आय से चलता था I एक वह खुद ट्यूशन पढ़ाता था तो दूसरा कभी-कभी घर से कुछ पैसे मिल जाते थे और कभी-कभी उसका छोटा भाई कुछ पैसा भेज देता था I जब पैसा मनी ऑर्डर से आता था तो उसमें ज्यादा चार्ज देना होता था इसीलिए उसका छोटा भाई ने सलाह दिया था की अब हम पैसा बैंक ड्राफ्ट से भेजेगे, जिससे पैसा जल्दी मिलेगा और चार्ज भी कम लगेगा I उसका बड़ा भाई इससे सहमत हो गया और सलाह किया कि पहले पाँच सौ रुपए की बैंक ड्राफ्ट भेजो जब वह खाते पर चढ़ जाएगा तब तुम ज्यादा रकम की बैंक ड्राफ्ट भेजना I सूर्य इससे सहमत हो गया I कुछ ही दिन बाद मणि के घर में पाँच सौ रुपए की बैंक ड्राफ्ट आ गया I मणि के पिता का पंजाब नेशनल बैंक में बचत खाता था जो पिछले कई वर्षो से लेन-देन नहीं होने के कारण बंद पड़ा था I मणि ने अपने पिता जी को बैंक जाने के लिए बोला ताकि बैंक ड्राफ्ट को क्लियर किया जा सके I मणि के पिता जी बैंक पहुंचे और बैंक ड्राफ्ट क्लियर करने को कहा तो बैंक के अधिकारी ने टेबल पर पासबुक फेकते हुए कहा की इतना पुराना बचत खाता पर अब कुछ काम नहीं हो सकता हैं और फिर से बैंक न आने कि हिदायत दे दिया I पिता ने घर आकार सारी बात मणि को बताया I मणि को बहुत गुस्सा आया और सोचने लगा कि एक किसान वर्ग को एक बैंक अधिकारी अशिक्षित क्यों समझते हैं ? यह बात सही है कि बचत खाता बहुत पुराना है I जब हमारे पिताजी उस समय बाज़ार में मेडिकल के दूकान में रहते थे उसी समय यह बचत खाता खुलाए थे I बचत खाता संख्या मात्र 107 था और उस समय बाज़ार में इस बैंक का शाखा नया खुला था I मणि ने बैंक अधिकारी को सबक सिखाने का संकल्प लिया I उसके मन में बहुत तरह की बाते चल रहा था I अचानक उसका चेहरा चमक उठा I वह वापस बिहारशरीफ चला गया I वह बिहारशरीफ़ में अंग्रेजी मजबूत करने के लिए “ फ़ेस तो फ़ेस “ क्लास में जाता था I जहाँ फराटेदार अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता था I मणि भी धीरे-धीरे अंग्रेजी बोलना सीख रहा था और अब वह अच्छी तरह से अंग्रेजी बोल भी सकता था I उसने सोचा क्यों न एक बार खुद बैंक जाकर खाते की जानकारी ली जाए I उसने मन ही मन सोचा कि जब मैं बैंक जाऊंगा तो सिर्फ और सिर्फ अंग्रेजी में बात करूंगा I इसके लिए उसने अभी से ही तैयारी शुरू कर दिया I कुछ दिन के बाद मणि अपना घर गया और पिताजी के साथ लेकर वह बैंक पहुँच गया I सबसे पहले मणि ने अपने पिताजी से पूछा वह कौन अधिकारी था जिसने उस दिन पासबुक टेबुल पर फेंक दिया था I उसके पिताजी ने इशारे से उस अधिकारी की ओर इशारा कर दिये I मणि ने उस अधिकारी के कमरे में घूँसा और अपना परिचय और उस दिन की सारी घटना अंग्रेजी में बोल दिया I अधिकारी हक्का-बक्का रह गया, शायद उसे कुछ समझ में आया और कुछ समझ में नहीं आया I अधिकारी ने एक दूसरे कर्मचारी की ओर इशारा करते हुए मणि को उससे मिलने को कहा, शायद वह अंग्रेजी अच्छी तरह जनता हो I मणि उसके पास गया और अपना परिचय देते हुए सारी घटना का जिक्र किया I कर्मचारी सारी घटना पूरी तरह समझ गया और मणि को बैठने के लिए कहा I मणि ने धन्यवाद बोलकर कुर्सी पर बैठ गया I उक्त कर्मचारी ने बही खाता निकाला और जाँचा तो पता चला कि खाता अभी चालू है और उस पर ब्याज अभी भी दिया जा रहा हैं I एक चपरासी को हस्ताक्षर की कॉपी खोजने के लिए कहा क्योंकि खाता बहुत पुराना था I थोड़ा मेहनत करने के बाद हस्ताक्षर का नमूना मिल गया और चपरासी ने कर्मचारी को दे दिया I कर्मचारी ने मणि को पाँच सौ रुपए नकद जमा करने को कहा I मणि ने पर्ची भरकर पाँच सौ रुपए जमा कर दिया I बचत खाता फिर से चालू हो गया I फिर मणि ने बैंक ड्राफ्ट को पर्ची में भरकर जमा कर दिया I मणि ने देखा की सारे बैंक कर्मचारी की आँखें चकित थी I और कुछ कर्मचारी ने फुसफुसाते हुए मणि ने यह भी सुना कि बैंक अधिकारी को सबक मिल चुका है I मणि ने अनुभव किया कि शायद कुछ कर्मचारी इस बैंक अधिकारी से परेशान था I मणि ने मन ही मन सोचा हमारा इससे क्या लेना देना हमारा अंग्रेजी अपना प्रभाव छोड़ चुका था I और मणि अपने पिता के साथ घर वापस आ गया I लेखक : नागमणि कुमार सिंह ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------