नागमणि कुमार सिंह 27 Aug 2026 कहानियाँ समाजिक त्याग की कीमत 866 0 Hindi :: हिंदी
शीर्षक : त्याग की कीमत मैं अपने माता जी से फोन पर बात कर रहे थे तभी हमें पता चला की मेरे फूफा जी की छोटे लड़के बलराम भाई की शादी हैं I बलराम भैया हमसे दो साल बड़े थे I मेरे माता जी ने बताया कि निमंत्रण पत्र आ चुका है और सपरिवार को निमंत्रण हैं I हमने माता जी से यह कहकर मोबाइल रख दिया कि इस बारे में हम सोचने के बाद हम बात करेगे I हमने सिर्फ शादी कि तारीख माता जी से पूछ लिए थे I संयोग से उक्त तारीख के आसपास हमारा घर जाने का टिकट लिया हुआ था I हमने सिर्फ टिकट देखकर पूरी तरह से तसल्ली कर ली और मन ही मन में खुश हुआ कि चलो अब दोनों काम हो जाएगा घर भी जाएगे और शादी में भी शामिल होगे I अगले दिन हम फिर माता जी से फोन पर बात किए और उन्हे टिकट कि जानकारी दे दी I मेरे माता जी बहुत खुश हुए I हमने नियत समय पर अपने घर पहुँच चुके थे I सब लोग शादी के उत्सव में जाने के लिए तैयार हो रहे थे I हम तीन भाई थे जो दो भागो में विभाजित था I बड़े भाई के परिवार अलग रहते थे जबकि मैं और मेरा छोटा भाई और हमारे माता-पिता एक साथ रहते थे I निमंत्रण पत्र में तीन नाम लिखा हुआ था I एक मेरा, एक मेरा छोटा भाई का और एक मेरे पिताजी का I जिससे स्पष्ट पता चल रहा था कि निमंत्रण पत्र अलग-अलग दिया गया था जबकि बड़े भाई जो पटना में रहते थे उनको अलग से निमंत्रण गया था I हम तीनों भाई में विभाजन हो चुका था I लेकिन हम छोटा भाई और माता-पिता एक साथ ही रहते थे I शादी के उत्सव में सभी लोग जाना चाहते थे सिर्फ पिताजी को छोड़कर क्योकि हमारे पिताजी लकवाग्रस्त थे I वह कही नहीं जा सकते थे I मेरे छोटा भाई भी उत्सव मे जाने के लिए तैयार था I मेरे माताजी का बिशेष प्रकार का निमंत्रण था क्योकि फूफा जी का अंतिम लड़का का शादी था और एक मामी जी का वहाँ विधि-विधान भी करना पड़ता था I मेरे चाची जी जो अंधे थे वह तो जा सकते थे लेकिन विधि-विधान में हिस्सा नहीं ले सकते थे I इसलिए मेरे माता जी का वहाँ जाना जरूरी था I परिवार के एक सदस्य को घर पर रहना जरूरी था क्योकि पिताजी की देखभाल करना था I तब हमने निर्णय लिया कि मैं शादी के उत्सव में नहीं जाऊँगा और घर पर रहकर पिता की देखभाल करूंगा I हम तो बहुत सारे उत्सव में जाते रहते है मेरे माता जी तो पिता जी के कारण कहीं नहीं जाती है I आज मौका है हम घर पर रहते है और माता जी को शादी के उत्सव में जाने को कहते हैं I सभी लोग नियत समय पर शादी के उत्सव में शामिल हुए और शादी का उत्सव खुशी पूर्वक मनाया I मेरे माता जी घर में वापस आ गए I उसी दिन हमारे फूफा जी का फोन आया, वह बोल रहे थे कि हमारा सारा परिवार इस शादी के उत्सव में शामिल हुआ था, सिर्फ आप शामिल नहीं हुए थे I हमने तो निमंत्रण पत्र पर आपका भी नाम लिखा था I यह अच्छी बात नहीं है हम भी आपके द्वारा आयोजित किसी भी उत्सव में नहीं आएगे I हमने अपने फूफा जी को समझाने कि कोशिश कि पिताजी के देखभाल के लिए एक सदस्य को घर पर रहना जरूरी था और हम, मेरा छोटा भाई, और माता-पिता एक ही परिवार के सदस्य हैं I लेकिन मेरे फूफा जी मानने के लिए तैयार नहीं थे I और फोन कट गया और हमे त्याग कि कीमत समझ में आ गया I लेखक : नागमणि कुमार सिंह -----------------------------------------------------------------------------------------